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महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन बिल के लिए सरकार का जादुई आंकड़ा करीब

सरकार महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन बिल को पारित कराने के लिए दो तिहाई बहुमत के करीब पहुँच चुकी है। एनडीए को 362 मतों की आवश्यकता है, और हाल ही में तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना के सांसदों के अलग गुट बनाने से स्थिति और भी रोचक हो गई है। जानें इस राजनीतिक घटनाक्रम के बारे में और अधिक जानकारी।
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महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन बिल के लिए सरकार का जादुई आंकड़ा करीब

महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन बिल की स्थिति


  • लोकसभा में दो तिहाई बहुमत के लिए एनडीए को 362 मतों की आवश्यकता


नई दिल्ली: संसद में महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन बिल को पारित कराने के लिए सरकार लगभग दो तिहाई बहुमत के जादुई आंकड़े के करीब पहुँच चुकी है। सूत्रों के अनुसार, इस मानसून सत्र में सरकार इन दोनों विधेयकों को फिर से पेश करने की योजना बना रही है। लोकसभा में दो तिहाई बहुमत प्राप्त करने के लिए सत्तारूढ़ एनडीए को 362 मतों की आवश्यकता है।


हाल ही में तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों ने एक अलग गुट बनाने का निर्णय लिया है। इसके बाद उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) के 6 सांसदों के अलग गुट बनाने के फैसले ने जादुई आंकड़े की चर्चा को और तेज कर दिया है। रिपोर्टों के अनुसार, समाजवादी पार्टी (सपा) में भी विभाजन की संभावना है। सूत्रों के मुताबिक, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से बातचीत चल रही है, जिसमें उनसे कहा गया है कि वे संसद से अनुपस्थित रहकर महिला आरक्षण विधेयक को पारित कराने में मदद करें, अन्यथा उनके 25 सांसदों का भाजपा में टूटना तय है।


लोकसभा में सीटों की संख्या

लोकसभा में कुल सीटें 543


हालांकि, सपा ने अभी तक इस बात को मानने से इनकार किया है। लोकसभा में कुल 543 सीटें हैं और दो तिहाई बहुमत के लिए 362 सीटों की आवश्यकता है। वर्तमान में, नौगांव, बशीरहाट और शिलॉन्ग की 3 सीटें खाली हैं, जिससे मौजूदा लोकसभा में कुल सांसदों की संख्या 540 हो जाती है। इस कारण, दो तिहाई बहुमत के लिए आवश्यक मतों की संख्या घटकर 360 हो जाती है। वर्तमान में भाजपा के पास 540 सांसद हैं, जिनमें से 240 भाजपा के हैं। समर्थक दलों को मिलाकर एनडीए का आंकड़ा 293 तक पहुँच जाता है।


अनुपस्थित सांसदों की संख्या

सपा के 37 और शरद पवार गुट के 9 सांसद रहेंगे अनुपस्थित


मोदी सरकार के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार, सरकार ने दो तिहाई सांसदों की संख्या जुटा ली है। उनका कहना है कि द्रमुक के 22 सांसद बिल के समर्थन में वोट देंगे, जबकि 37 सपा और 9 शरद पवार गुट के सांसद संसद में अनुपस्थित रहकर महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन बिल को पारित कराने में सरकार की मदद करेंगे। 540 की कुल संख्या में से यदि सपा के 37 और एनसीपी के 9 सांसद अनुपस्थित रहते हैं, तो सांसदों की संख्या 494 हो जाएगी। इस प्रकार, दो तिहाई बहुमत के लिए सरकार को 330 सांसदों की आवश्यकता होगी, जो पूरी हो चुकी है।