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महिला आरक्षण विधेयक पर राहुल गांधी की बिना शर्त मांग

महिला आरक्षण विधेयक को लेकर राहुल गांधी ने बिना शर्त लागू करने की मांग की है। उन्होंने संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू की टिप्पणियों का जवाब देते हुए कहा कि यह विधेयक पहले ही पारित हो चुका है। जानें इस मुद्दे पर दोनों नेताओं के बीच क्या बातचीत हुई और कांग्रेस पार्टी की भूमिका क्या है।
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महिला आरक्षण पर सियासी बयानबाजी


महिला आरक्षण विधेयक: संसद के मॉनसून सत्र के अंतिम चार दिनों में डिलिमिटेशन, महिला आरक्षण और FCRA बिल को लेकर चर्चाएँ तेज हो गई हैं। इस संदर्भ में भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी बढ़ गई है। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू की टिप्पणियों का जवाब देते हुए 2023 के महिला आरक्षण कानून को बिना किसी शर्त लागू करने की मांग की है।


कांग्रेस द्वारा साझा किए गए राहुल गांधी के वीडियो संदेश को किरेन रिजिजू ने महिला आरक्षण से जोड़ा था। इस वीडियो में राहुल ने कहा, "भारत की महिलाओं की ऊर्जा दबी हुई है। उन्हें खुद को व्यक्त करने या कल्पना करने की स्वतंत्रता नहीं है। मेरा मानना है कि कोई भी देश तब तक सफल नहीं हो सकता जब तक वहाँ की महिलाएँ खुद को व्यक्त न कर सकें। मेरी राजनीति का एक बड़ा हिस्सा इसी बात पर केंद्रित है कि लोगों को यह समझाया जाए कि महिलाओं की अभिव्यक्ति के बिना हमारा देश अधूरा और अविकसित है।"



इस वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए किरेन रिजिजू ने एक्स पर लिखा, "यह कांग्रेस पार्टी की ओर से एक सकारात्मक संदेश लगता है। महिलाओं के प्रति श्री राहुल गांधी जी की सोच में स्पष्ट बदलाव दिख रहा है। अब मुझे उम्मीद है कि कांग्रेस पार्टी महिला आरक्षण विधेयक का बिना किसी शर्त के समर्थन करेगी।" इस पर राहुल गांधी ने जवाब देते हुए लिखा, "रिजिजू जी, संसदीय कार्य मंत्री होने के नाते आपसे बेहतर यह कौन जानता होगा - महिला आरक्षण विधेयक 2023 में ही सर्वसम्मति से पारित हो चुका है, कांग्रेस के पूर्ण समर्थन के साथ। सवाल यह है कि तीन साल बाद भी वह लागू क्यों नहीं हुआ और अब आप उसे परिसीमन से बेवजह क्यों जोड़ना चाहते हैं? 2023 का कानून लागू कीजिए। बिना किसी शर्त के।"