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मायावती ने चंद्रशेखर और भाजपा पर ईवीएम में छेड़छाड़ का आरोप लगाया

बसपा प्रमुख मायावती ने आजाद समाज पार्टी के नेता चंद्रशेखर और भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा ने ईवीएम में छेड़छाड़ कर चंद्रशेखर को जीत दिलाई, जबकि उनके पास कोई जनाधार नहीं है। मायावती ने चंद्रशेखर के धरना-प्रदर्शन के तरीकों पर भी सवाल उठाए और दलितों से अपील की कि वे उनके बहकावे में न आएं। इसके अलावा, उन्होंने ईवीएम और वीवीपैट की प्रक्रिया पर भी चिंता जताई।
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मायावती का आरोप

लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की नेता मायावती ने आजाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर और भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा ने ईवीएम में छेड़छाड़ कर चंद्रशेखर को जीत दिलाई, जबकि उनके पास क्षेत्र में कोई जनाधार नहीं है। मायावती ने यह भी कहा कि स्थानीय लोग अक्सर इस बात का जिक्र करते हैं।


चंद्रशेखर पर आरोप

मायावती ने सांसद चंद्रशेखर पर यह भी आरोप लगाया कि वे दलितों के मुद्दों पर अधिकारियों से बातचीत करने के बजाय धरना-प्रदर्शन का सहारा लेते हैं। इससे युवाओं पर कानूनी मामले दर्ज हो जाते हैं, जिससे उन्हें सरकारी नौकरी पाने में कठिनाई होती है। उन्होंने दलितों से अपील की कि वे चंद्रशेखर के बहकावे में न आएं। इस संदर्भ में, बसपा ने हमेशा ईवीएम द्वारा मतदान के खिलाफ आवाज उठाई है।


ईवीएम और वीवीपैट पर सवाल

मायावती ने कहा कि जब ईवीएम के खिलाफ आपत्तियों को नजरअंदाज किया गया, तब बसपा ने सुप्रीम कोर्ट में चुनाव प्रक्रिया को चुनौती दी थी। अदालत ने ईवीएम के साथ वीवीपैट लगाने का निर्देश दिया, लेकिन उन्होंने इस व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि सभी वीवीपैट पर्चियों की गिनती नहीं होने के कारण ईवीएम में दर्ज मतों का सही मिलान नहीं हो पाता। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक मशीनों में छेड़छाड़ और हैकिंग की आशंका जताते हुए कहा कि इससे मतदाता का वोट सही तरीके से दर्ज होने पर संदेह होता है।


भाजपा का ईवीएम पर रुख

मायावती ने यह भी बताया कि देश में पहले के चुनावों में लगभग पांच दशकों तक बैलेट पेपर का उपयोग किया गया। इसके बाद चुनाव आयोग ने ईवीएम का उपयोग शुरू किया। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी, तब भाजपा ने भी ईवीएम का विरोध किया था। उन्होंने सवाल उठाया कि भाजपा ने केंद्र में सरकार बनने के बाद ईवीएम प्रणाली को खत्म करने के बजाय इसे जारी क्यों रखा?