मायावती ने परिवारवाद को किया खारिज, युवाओं को प्राथमिकता देने का किया ऐलान
मायावती का स्पष्ट संदेश
लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने पार्टी में परिवारवाद को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सक्रिय रहते हुए, मायावती ने शनिवार को एक पोस्ट के माध्यम से पार्टी की नीति को स्पष्ट किया। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने भाई आनंद कुमार के किसी भी बेटे को पार्टी में कोई पद देने से मना कर दिया है। उन्होंने कहा कि उनके भाई के बच्चों को भी पार्टी की जिम्मेदारी नहीं सौंपी जाएगी।
1. वैसे तो बहुजन समाज पार्टी (बी.एस.पी.) द्वारा पूरे देश भर में व ख़ासकर उत्तर प्रदेश में युवाओं को तरजीह देने की नीति के तहत जेन-जी को लगभग पचास प्रतिशत तक पार्टी संगठन में भागीदारी सुनिश्चित करने की प्रक्रिया काफी लम्बे समय से जारी है, किन्तु अब यूपी, उत्तराखण्ड एवं पंजाब…
— Mayawati (@Mayawati) September 12, 2026
बसपा प्रमुख ने स्पष्ट किया कि आनंद कुमार के किसी बेटे को पार्टी में कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। यदि आवश्यक हुआ, तो उनकी बेटी कुमारी दीपिका आनंद, जो वकालत की पढ़ाई कर रही हैं, भविष्य में मदद कर सकती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि दीपिका तैयार नहीं होती हैं, तो पार्टी की सहमति से किसी अन्य कार्यकर्ता को जिम्मेदारी दी जा सकती है। मायावती ने कहा कि किसी एक व्यक्ति को जिम्मेदारी मिलने के बहाने उसके परिवार के अन्य सदस्यों को राजनीतिक लाभ नहीं दिया जाएगा। उन्होंने पार्टी में युवाओं की भागीदारी को बढ़ाने की बात भी की।
युवाओं को प्राथमिकता देने की प्रक्रिया
मायावती ने कहा कि पार्टी में युवाओं, विशेषकर जेन-जी और नई पीढ़ी को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया लंबे समय से चल रही है। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब विधानसभा चुनावों में भी योग्य और युवा प्रतिभाओं को उम्मीदवार बनाने में प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं। उनका उद्देश्य नई पीढ़ी के माध्यम से अंबेडकरवादी राजनीति और संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करना है। उन्होंने भारतीय संविधान के मानवतावादी, समतामूलक और धर्मनिरपेक्ष उद्देश्यों को लागू करने पर जोर दिया।
मायावती ने कहा कि बसपा शासन के दौरान सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और विकास के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण कार्य किए गए। उन्होंने दावा किया कि इन प्रयासों से लोगों का पलायन काफी हद तक रुका। पार्टी कार्यकर्ताओं को उम्मीदवार चयन में सर्वसमाज के अच्छे लोगों के साथ युवा महिलाओं और पुरुषों को प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने परिवारवाद के मुद्दे पर भी स्पष्ट रुख अपनाया कि उनके परिवार के किसी सदस्य को राजनीतिक लाभ नहीं दिया जाएगा।
