मिडिल ईस्ट संघर्ष का समुद्री व्यापार पर प्रभाव
समुद्री व्यापार पर युद्ध का असर
मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध का प्रभाव अब समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय नौवहन पर स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। सरकारी जानकारी के अनुसार, 28 फरवरी से अब तक खाड़ी क्षेत्र में 13 भारतीय नागरिकों की मृत्यु हो चुकी है, जबकि तीन अन्य अभी भी लापता हैं।
व्यावसायिक जहाजों पर हमले
अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाज लगातार हमलों का शिकार बन रहे हैं, जिससे इस महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्ग पर संकट गहरा गया है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही की आवश्यकता को उठाया है।
ईरान-अमेरिका संघर्ष के बाद बिगड़े हालात
अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ईरान पर हवाई हमले किए, जिसके जवाब में ईरान ने क्षेत्र में कई सैन्य और समुद्री कदम उठाए। हालात तब और गंभीर हो गए जब होर्मुज में व्यावसायिक जहाजों पर हमले बढ़ने लगे, जिससे इस रणनीतिक जलमार्ग पर आवाजाही प्रभावित हुई। ईरान की ओर से जलमार्ग की नाकेबंदी की घोषणा और जहाजों पर हमलों ने वैश्विक व्यापार और समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
भारत की प्रतिक्रिया
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि हाल ही में दो व्यावसायिक जहाजों पर हमले हुए, जिनमें कुल 30 भारतीय नाविक सवार थे। एक जहाज पर मौजूद 12 भारतीयों में से एक की मृत्यु हो गई, जबकि दूसरे जहाज पर सवार 18 भारतीयों में से नौ गंभीर रूप से घायल हुए हैं। उन्होंने कहा कि हालिया समुद्री हमलों में भारतीय नाविकों की संख्या सबसे अधिक रही है।
समुद्री सुरक्षा की मांग
भारत ने स्पष्ट किया है कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत सभी देशों के लिए समुद्री मार्गों पर मुक्त और निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित की जानी चाहिए। भारत ने व्यावसायिक जहाजों और नागरिक ढांचे पर हो रहे हमलों को तुरंत रोकने की मांग की है। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज की सुरक्षा व्यवस्था को फिर से लागू करने की घोषणा की है। संघर्ष विराम समझौता टूटने के बाद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है, जिससे पूरे खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ रही है।
