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मुंबई में विराट गर्जना मोर्चा: चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष का प्रदर्शन

मुंबई में विपक्ष ने चुनाव आयोग के खिलाफ विराट गर्जना मोर्चा निकाला, जिसमें शिवसेना और मनसे के नेता शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने तिरंगा और संविधान के साथ मार्च किया और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। नेताओं ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर चिंता जताई और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की। इस प्रदर्शन ने राजनीतिक एकजुटता का प्रतीक बनकर लोकतंत्र और मताधिकार की रक्षा का संदेश दिया।
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विपक्ष का विरोध प्रदर्शन तेज

मुंबई - मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का विरोध बढ़ता जा रहा है। रविवार को शिवसेना (यूबीटी) के नेता उद्धव ठाकरे, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के प्रमुख राज ठाकरे और महा विकास आघाड़ी (एमवीए) के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने मुंबई में एक बड़ा ‘विराट गर्जना मोर्चा’ निकाला। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर सवाल उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की।


तिरंगा और संविधान के साथ प्रदर्शन

तिरंगा और संविधान लेकर निकले प्रदर्शनकारी


यह मोर्चा मेट्रो सिनेमा से शुरू होकर सीएसएमटी के पास बीएमसी मुख्यालय के बाहर जनसभा में तब्दील हो गया। खास बात यह रही कि प्रदर्शनकारियों ने किसी राजनीतिक दल का झंडा नहीं उठाया। बड़ी संख्या में लोग तिरंगा और संविधान की प्रतियां लेकर मार्च में शामिल हुए। आयोजकों ने इसे लोकतंत्र और मताधिकार की रक्षा के लिए एक जनआंदोलन बताया।


चुनाव आयोग पर सवाल उठाते नेता

एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग पर निशाना


प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। विपक्षी नेताओं का कहना है कि एसआईआर के माध्यम से बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रभावित हो सकते हैं, जिससे उनके मताधिकार पर असर पड़ सकता है। हालांकि, चुनाव आयोग ने चुनावी प्रक्रिया को कानूनी और संवैधानिक प्रावधानों के तहत संचालित करने का दावा किया है।


केंद्र सरकार पर आरोप

‘वोट चोरी’ के आरोप को बनाया मुद्दा


मोर्चे को संबोधित करते हुए एमवीए नेताओं ने केंद्र सरकार पर भी निशाना साधा। कांग्रेस नेता बालासाहेब थोराट और एनसीपी (एसपी) के नेताओं ने चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और ‘वोट चोरी’ के आरोप लगाए। नेताओं ने लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया।


अभिजीत दीपके की प्रतिक्रिया

अभिजीत दीपके बोले- ‘अभी नहीं तो कभी नहीं’


इस विरोध प्रदर्शन पर सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के प्रदर्शन का वीडियो साझा करते हुए कहा कि मुंबई एक बार फिर निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव की मांग को लेकर सड़कों पर है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों के साथ एकजुटता जताते हुए कहा कि सभी भारतीयों को एक साथ आने की जरूरत है।


राजनीतिक एकजुटता का प्रतीक

राजनीतिक एकजुटता दिखाने की कोशिश


उद्धव और राज ठाकरे का एक मंच पर आना इस प्रदर्शन की प्रमुख राजनीतिक घटनाओं में से एक रहा। एमवीए के नेताओं की मौजूदगी ने विपक्षी दलों के बीच चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर व्यापक एकजुटता दिखाने का प्रयास किया। प्रदर्शनकारियों ने लोकतंत्र, संविधान और मताधिकार की रक्षा को आंदोलन का मुख्य मुद्दा बताया।