मोदी सरकार की चुनौतियाँ: ज़ेन-जी आंदोलन और युवा असंतोष
मोदी सरकार की स्थिति पर सवाल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में भाजपा की चुनावी सफलता पर सवाल उठने लगे हैं। यह स्पष्ट हो गया है कि मोदी सरकार ने जनमानस में जो प्रभाव खो दिया है, वह पहले की तरह चुनौती-मुक्त स्थिति में नहीं है। अब जो प्रभाव बचा है, वह मुख्यतः सुरक्षा बलों और पुलिस की दमनकारी शक्ति पर निर्भर है।
कॉकरोच आंदोलन का प्रभाव
20 जुलाई को दिल्ली में युवा प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई के बाद कॉकरोच आंदोलन ने तेजी से देशभर में फैलना शुरू किया। इस स्थिति को नियंत्रित करना केंद्र सरकार की प्राथमिकता बन गई।
भाजपा की कार्यशैली में जवाबदेही का सवाल उठाना और किसी मंत्री को हटाना एक असाधारण उपलब्धि मानी जाएगी। धर्मेंद्र प्रधान को मंत्री पद से हटाने के लिए मोदी और भाजपा नेतृत्व को काफी प्रयास करने पड़े होंगे।
ज़ेन-जी परिघटना और सरकार की प्रतिक्रिया
मोदी सरकार ज़ेन-जी आंदोलन को लेकर पहले से चिंतित थी। इसीलिए उसने कॉकरोच आंदोलन के प्रति नरम रुख अपनाया। सरकार जानती थी कि युवा वर्ग का दमन आत्मघाती हो सकता है।
सोशल मीडिया का प्रभाव और पढ़े-लिखे युवाओं की सक्रियता ने सरकार को सतर्क कर दिया है। पिछले चार वर्षों में श्रीलंका, बांग्लादेश और नेपाल में हुई घटनाओं का असर मोदी सरकार पर रहा है।
आर्थिक चुनौतियाँ और युवा असंतोष
मोदी सरकार की आर्थिक नीतियाँ शिक्षित युवाओं को रोजगार देने में असफल रही हैं। उच्च डिग्रीधारी युवाओं के लिए नौकरी की कमी बढ़ती जा रही है।
जून 2026 में आईटी क्षेत्र में नई नियुक्तियों में गिरावट आई है, जिससे युवा वर्ग में निराशा बढ़ी है।
भविष्य की चुनौतियाँ
कॉकरोच आंदोलन ने यह दिखाया है कि आज के दौर में बिना किसी संगठित शक्ति के भी सरकार को चुनौती दी जा सकती है। मोदी सरकार के रणनीतिकारों ने इस आंदोलन की ताकत को समझा है।
हालांकि, यह स्पष्ट है कि मोदी सरकार को अपनी समस्याओं का समाधान करना होगा, अन्यथा युवा वर्ग का असंतोष और बढ़ सकता है।
