मोदी सरकार की चुनौतियाँ: युवा पीढ़ी की नजर में गिरता चेहरा
मोदी का शासन और युवा पीढ़ी की प्रतिक्रिया
नरेंद्र मोदी को भारत का प्रधानमंत्री बनाने का निर्णय समय ने लिया था, और अब जुलाई 2026 में यह स्पष्ट हो रहा है कि उनके साथ संघ परिवार और हिंदू राजनीति का भी पतन हो रहा है। मोदी राज ने हिंदुओं के चाल, चेहरे और चरित्र को एक नई पहचान दी है, जो अब देश की युवा पीढ़ी और वैश्विक समुदाय के सामने है। यह स्थिति दर्शाती है कि उनकी नीतियाँ देश को पराश्रित और बाजार में बिकाऊ बनाने की ओर अग्रसर हैं।
मई 2025 के ऑपरेशन सिंदूर से लेकर जुलाई 2026 तक, क्या कोई ऐसी घटना हुई है जिसने मोदी और उनकी सरकार की प्रशंसा की हो? सरकार ने जो शक्ति और जीत का नैरेटिव प्रस्तुत किया, उस पर देश और दुनिया की प्रतिक्रिया क्या रही? मोदी और शाह भले ही भक्तों की प्रशंसा में खोए रहें, लेकिन 2024 के आम चुनावों में उन्हें अप्रत्याशित झटके का सामना करना पड़ा।
भारत की युवा जनसंख्या में 35 वर्ष से कम उम्र के लोग लगभग 65 प्रतिशत हैं, जिसमें 15 से 29 वर्ष के बीच की पीढ़ी की संख्या 37 करोड़ है। ये युवा अब मोदी की नीतियों और उनके वादों पर सवाल उठा रहे हैं। क्या मोदी अपनी रील्स के माध्यम से इन युवाओं को रोजगार देने का आश्वासन दे पाएंगे? अच्छे दिन और नौकरियों के वादे अब उनकी बातों से मेल नहीं खा रहे हैं।
मोदी का चेहरा अब युवाओं के लिए मजाक और गालियों का केंद्र बन गया है। भाजपा और संघ के पास कोई दूसरा चेहरा नहीं है, जिसे वे आगे बढ़ा सकें। मोदी सरकार की हर संस्था अब विश्वास के लायक नहीं रही है।
सोचें, सोनम वांगचुक और अभिजीत दीपके जैसे अनाम लोग अचानक युवाओं के दिलों में कैसे छा गए। लेकिन जब वांगचुक ने भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के हाथ से जूस पीया, तो युवाओं ने उनसे नाता तोड़ लिया।
संघ परिवार और भाजपा के लिए यह समझना आवश्यक है कि यह नया असंस्कारी भारत उनकी ही देन है। झूठ बोलकर धोखा देने और अनैतिकताओं को बढ़ावा देने से ही युवाओं में असंतोष बढ़ा है।
