मोदी सरकार में अल्पसंख्यक मंत्रियों की कमी: मुस्लिम और ईसाई प्रतिनिधित्व पर सवाल
मोदी सरकार में अल्पसंख्यक मंत्रियों की अनुपस्थिति
नरेंद्र मोदी की सरकार में पिछले कई वर्षों से कोई मुस्लिम मंत्री नहीं है, जिससे देश की लगभग 15 प्रतिशत मुस्लिम आबादी का प्रतिनिधित्व नहीं हो रहा है। भाजपा ने पिछले लोकसभा चुनाव में किसी मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट नहीं दिया था, और राज्यसभा में भी कोई मुस्लिम सदस्य नहीं है। पहले एमजे अकबर और मुख्तार अब्बास नकवी मंत्री थे, लेकिन दोनों अब सरकार से बाहर हो चुके हैं।
अब ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार में एकमात्र ईसाई मंत्री जॉर्ज कुरियन को भी रिटायर किया जा सकता है। वे मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद हैं, लेकिन इस बार उन्हें टिकट नहीं मिला है। यदि उन्हें राज्यसभा में पुनः स्थान नहीं मिलता, तो वे भी सरकार से बाहर हो जाएंगे। इससे पहले केजे अल्फोंस भी मंत्री रह चुके हैं, लेकिन उन्हें भी पुनः राज्यसभा में स्थान नहीं मिला।
मुस्लिम और ईसाई, दोनों ही प्रमुख अल्पसंख्यक समूह हैं, जो सरकार से बाहर हो सकते हैं। इसके अलावा, यह भी चर्चा है कि क्या सिख मंत्रियों की संख्या में भी कमी आएगी। वर्तमान में, रवनीत सिंह बिट्टू और हरदीप सिंह पुरी मोदी सरकार में मंत्री हैं। हालाँकि, हरदीप सिंह पुरी का कार्यकाल इस साल नवंबर में समाप्त हो रहा है और उन पर कई आरोप भी लगे हैं।
यदि पुरी का कार्यकाल नवीनीकरण नहीं होता है, तो किसी नए सिख मंत्री को शामिल करना आवश्यक होगा। इस संदर्भ में अटकलें लगाई जा रही हैं। जैन और बौद्ध भी अल्पसंख्यक माने जाते हैं, लेकिन हिंदू समाज उन्हें अपने से अलग नहीं मानता।
