मोहन भागवत का न्यूयॉर्क में ऐतिहासिक भाषण: एकता और विविधता का संदेश
न्यूयॉर्क में मोहन भागवत का कार्यक्रम
नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत का कार्यक्रम न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डेन में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम का विरोध न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी और अन्य संगठनों द्वारा किया गया था, लेकिन किसी ने भी कार्यक्रम में बाधा नहीं डाली। भागवत ने पांच हजार से अधिक भारतीय अमेरिकियों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत की पहचान एकता और विविधता में निहित है।
न्यूयॉर्क में एक अन्य कार्यक्रम ‘वन वर्ल्ड, वन ह्यूमैनिटी’ में भागवत ने हिंदुओं को संबोधित करते हुए कहा कि जो हिंदू मुसलमानों को देश में नहीं रहने देना चाहता, वह असल में हिंदू नहीं है। उन्होंने कहा, ‘यदि कोई हिंदू यह सोचता है कि मुसलमानों के लिए भारत में कोई स्थान नहीं है, तो वह हिंदू नहीं रह जाता।’ भागवत ने स्पष्ट किया कि हिंदुत्व का अर्थ किसी को बाहर करना नहीं है, बल्कि सभी की गरिमा और मानवता की एकता पर विश्वास करना है।
शनिवार की शाम को मैडिसन स्क्वायर गार्डेन में भागवत ने लगभग 45 मिनट तक भाषण दिया, जिसमें उन्होंने कहा कि भारत के डीएनए में एकता और विविधता है। उन्होंने कहा कि लोग भिन्न दिखते हैं और उनके रहने के तरीके अलग हैं, लेकिन सभी के बीच एक गहरा संबंध है। भागवत ने कहा, ‘विविधता में एकता भारत की पारंपरिक सोच है और देश ने समय-समय पर इसे पूरी दुनिया को समझाया है।’
इस कार्यक्रम में पांच हजार से अधिक भारतीय मूल के अमेरिकी शामिल हुए। इसका आयोजन अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग (अहेड) ने किया था, जिसमें 30 देशों के 180 धार्मिक नेता भी उपस्थित थे। भागवत ने कहा कि भारत में धर्म को केवल पूजा या आस्था के रूप में नहीं देखना चाहिए, बल्कि यह एक व्यवस्था है जो ब्रह्मांड और जीवन को संतुलित रखती है।
