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मोहन भागवत का युवाओं से संवाद: Gen Z और Gen Alpha की सोच पर महत्वपूर्ण बातें

RSS प्रमुख मोहन भागवत ने मुंबई में युवाओं के साथ संवाद करते हुए Gen Z और Gen Alpha की सोच पर महत्वपूर्ण विचार साझा किए। उन्होंने शिक्षा, आरक्षण और LGBTQ समुदाय के प्रति समाज की सोच पर भी अपने विचार रखे। भागवत ने कहा कि नई पीढ़ी को सवाल पूछने का अधिकार है और उन्हें राष्ट्र-विरोधी नहीं समझा जाना चाहिए। इस संवाद में उन्होंने खुली बातचीत और संवाद के महत्व पर जोर दिया। जानें उनके विचारों के पीछे की सोच और युवा मुद्दों पर संघ की बदलती दृष्टि।
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नई दिल्ली में मोहन भागवत का संवाद


नई दिल्ली: RSS के प्रमुख मोहन भागवत ने हाल ही में मुंबई में युवाओं के साथ एक संवाद सत्र आयोजित किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान पीढ़ी, जिसे Gen Z और Gen Alpha कहा जाता है, को सवाल पूछने का अधिकार है और उन्हें 'राष्ट्र-विरोधी' कहना अनुचित है।


संवाद का महत्व

भागवत ने NMACC में IIMUN कार्यक्रम के दौरान यह बातें कहीं, जहां 15 से 19 साल के लगभग 2000 स्कूली छात्र उपस्थित थे। Gen Z के विरोध प्रदर्शनों पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा, "वे राष्ट्र-विरोधी नहीं हैं। वे हमारी अगली पीढ़ी हैं।"


उन्होंने यह भी कहा कि संस्थाओं और युवाओं के बीच संवाद को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि टकराव से पहले बातचीत का रास्ता अपनाना चाहिए। भागवत ने अपने समय की तुलना करते हुए कहा, "हम बड़े लोगों की बात मान लेते थे, लेकिन अब Gen Z तार्किक उत्तर मांगती है, जो एक सकारात्मक बदलाव है।"


नई पीढ़ी की सराहना

भागवत ने नई पीढ़ी की ईमानदारी और देशभक्ति की सराहना की। जंतर-मंतर पर हुए लाठीचार्ज का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, "मुझे पूरी जानकारी नहीं है, लेकिन मैं Gen Z पर भरोसा करता हूं।" उन्होंने भारतीय परंपरा के 'शास्त्र' का उदाहरण देते हुए कहा कि विभिन्न रायों को सुनना आवश्यक है।


शिक्षा और आरक्षण पर विचार

शिक्षा के संदर्भ में भागवत ने कहा कि शिकायतें उचित हैं। उन्होंने कहा, "शिक्षा कोई व्यवसाय नहीं है, यह जीवन की आवश्यकता है। इसे सभी के लिए सुलभ और सस्ता बनाना चाहिए।"


आरक्षण पर उन्होंने कहा, "जब तक सामाजिक भेदभाव है, आरक्षण जारी रहना चाहिए। लेकिन जिन्हें पहले लाभ मिल चुका है, उन्हें दूसरों के लिए जगह छोड़नी चाहिए।"


LGBTQ और लीडरशिप पर विचार

LGBTQIA+ समुदाय के बारे में भागवत ने कहा कि यह समाज का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और भारतीय समाज ने हमेशा उन्हें स्वीकार किया है। परिवार को उन्होंने समाज की मूल इकाई बताया।


लीडरशिप पर भागवत ने कहा कि असली लीडर वह होता है जो पर्दे के पीछे रहकर टीम को आगे बढ़ाता है। उन्होंने यह भी कहा, "मैं खुद को लीडर नहीं मानता।" इस संवाद को युवा मुद्दों पर संघ की बदलती सोच के रूप में देखा जा रहा है।