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मोहन भागवत ने जनरेशन Z के प्रति संवाद की आवश्यकता पर जोर दिया

मोहन भागवत ने हाल ही में छात्रों के विरोध प्रदर्शन पर अपने विचार साझा किए, जिसमें उन्होंने जनरेशन Z को देशविरोधी नहीं बल्कि देशभक्त बताया। उन्होंने संवाद और शास्त्रार्थ की आवश्यकता पर जोर दिया, यह कहते हुए कि नई पीढ़ी बिना तर्क के कुछ भी स्वीकार नहीं करती। भागवत ने लोकतंत्र में विरोध को आम सहमति बनाने का एक तरीका बताया और कहा कि आंदोलन का उद्देश्य सिस्टम में सुधार होना चाहिए। जानें उनके विचारों के बारे में और अधिक जानकारी इस लेख में।
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नई दिल्ली में छात्रों के विरोध पर विचार


नई दिल्ली। हाल ही में जंतर-मंतर पर छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान उन्हें 'राष्ट्र-विरोधी' कहे जाने पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने 'इंडियाज इंटरनेशनल मूवमेंट टु यूनाइटेड नेशन्स' की 15वीं वर्षगांठ के अवसर पर युवाओं से संवाद किया। IIMUN के संस्थापक ऋषभ शाह के साथ बातचीत में उन्होंने कहा कि 'Gen-Z देशविरोधी नहीं, बल्कि हमारी पीढ़ी से अधिक देशभक्त हैं।' भागवत ने यह भी बताया कि विरोध प्रदर्शन संवाद का एक तरीका है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी बिना तर्क के कुछ भी स्वीकार नहीं करती, इसलिए उनके साथ संवाद और 'शास्त्रार्थ' की आवश्यकता है, न कि उन्हें खारिज करने की।


संघ प्रमुख ने 'दुनिया को जोड़ने में युवाओं की भूमिका' पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा, 'मैं आंख बंद करके Gen Z पर भरोसा करता हूं। जब हम उनकी उम्र के थे, तो हम बड़े लोगों की बात मान लेते थे, लेकिन अब Gen Z सवाल पूछते हैं। उन्हें प्यार और लोकतंत्र में विरोध की आवश्यकता है, जो आम सहमति बनाने का एक तरीका है।'


भागवत ने आगे कहा कि लोकतंत्र में विरोध भी आम सहमति बनाने का एक साधन है। विभिन्न विचारों के सामने आने पर चर्चा के माध्यम से सहमति बनती है। यदि किसी कारणवश बात नहीं सुनी जाती, तो आंदोलन किया जा सकता है, लेकिन यह बंटवारे के लिए नहीं, बल्कि सुधार के लिए होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हाल ही में जो घटनाएं हुईं, उनकी शिकायतें सही हैं और भारत की शिक्षा प्रणाली में सुधार की आवश्यकता है। इसलिए संवाद होना चाहिए।


उन्होंने यह भी कहा कि हर किसी का अपना दृष्टिकोण होता है, और विभिन्न राय मिलकर सच्चाई की पूरी तस्वीर बनाती हैं। Gen Z को विरोध करने का अधिकार है, लेकिन लोकतंत्र में विरोध और कार्य करने के तरीके होते हैं। संविधान के निर्माताओं ने इस पर संकेत दिए हैं। हमें यह समझना चाहिए कि Gen Z अपनी समस्याओं के समाधान के लिए आवाज उठा रही है। आंदोलन का उद्देश्य सिस्टम को सुधारना होना चाहिए, न कि व्यक्तिगत विरोध।