यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी जहाजों की समुद्री नाकेबंदी की घोषणा
पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव
पश्चिम एशिया में जारी तनाव अब एक नए चरण में प्रवेश कर चुका है। होरमुज़ जलडमरूमध्य में पहले से ही अस्थिर स्थिति के बीच, यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के जहाजों के लिए समुद्री नाकेबंदी की घोषणा की है। इस कदम ने वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय बाजार पर इसके प्रभाव को लेकर चिंताओं को और बढ़ा दिया है.
हूती विद्रोहियों की घोषणा
यमन के हूती आंदोलन के प्रवक्ता याह्या सरी ने सोमवार को अपने आधिकारिक सोशल मीडिया चैनल पर एक वीडियो संदेश में कहा कि सऊदी अरब के जहाजों के खिलाफ यह नाकेबंदी तुरंत प्रभाव से लागू की जा रही है। हूती संगठन का कहना है कि यह कदम यमन की राजधानी सना पर सऊदी अरब द्वारा लगाए गए दबाव और घेराबंदी के जवाब में उठाया गया है.
सऊदी अरब का हवाई हमला
पिछले सप्ताह सऊदी अरब ने सना हवाई अड्डे पर हमला किया था, जिसके बाद हूती विद्रोहियों ने दक्षिणी सऊदी अरब के एक हवाई अड्डे को निशाना बनाया। यह स्थिति वर्ष 2022 में हुए युद्धविराम के बाद दोनों पक्षों के बीच सबसे गंभीर सैन्य तनाव मानी जा रही है.
वैश्विक ऊर्जा बाजार पर प्रभाव
इस नए घटनाक्रम ने पहले से प्रभावित वैश्विक ऊर्जा बाजार की चिंताओं को और बढ़ा दिया है। होरमुज़ जलडमरूमध्य में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते टकराव के कारण तेल परिवहन पहले ही प्रभावित हो चुका है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के कुल कच्चे तेल की आपूर्ति का लगभग 20% संभालता है. यदि लाल सागर का मार्ग भी बाधित होता है, तो अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति पर और दबाव पड़ सकता है.
सऊदी अरब का निर्यात मार्ग
सूत्रों के अनुसार, होरमुज़ जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ने के बाद, सऊदी अरब ने अपने अधिकांश कच्चे तेल के निर्यात को लाल सागर के यनबू बंदरगाह के माध्यम से भेजना शुरू कर दिया था। पिछले महीने इस बंदरगाह से प्रतिदिन लगभग 4.19 मिलियन बैरल कच्चे तेल का निर्यात हुआ, जो अब तक का सबसे अधिक स्तर माना गया.
तेल टैंकरों पर खतरा
हालांकि, अब यही मार्ग भी खतरे में दिखाई दे रहा है। लाल सागर से गुजरने वाले तेल टैंकर पहले भी हूती विद्रोहियों के हमलों का सामना कर चुके हैं। यदि इस मार्ग पर बड़े पैमाने पर रुकावट आती है, तो तेल की ढुलाई धीमी पड़ सकती है और कई देशों को वैकल्पिक समुद्री रास्तों का सहारा लेना पड़ सकता है, जिससे परिवहन लागत में वृद्धि हो सकती है.
ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि
ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतों में भी इस घटनाक्रम का असर देखने को मिला है। सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट कच्चा तेल मामूली बढ़त के साथ लगभग 88.23 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था. निवेशकों के बीच संघर्ष और बढ़ने की आशंका है, जबकि दूसरी ओर कूटनीतिक समाधान की उम्मीद भी बनी हुई है.
भविष्य की चुनौतियाँ
वर्ष 2023 के अंत में भी हूती विद्रोहियों ने लाल सागर के दक्षिणी प्रवेश द्वार बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के आसपास कई महीनों तक समुद्री गतिविधियों को प्रभावित किया था। उस समय एशिया और यूरोप के बीच का सबसे छोटा समुद्री व्यापार मार्ग लगभग ठप हो गया था, जिससे अनेक जहाजों को लंबा वैकल्पिक रास्ता अपनाना पड़ा था. इस प्रकार, ताजा नाकेबंदी की घोषणा को वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री व्यापार के लिए एक गंभीर चुनौती के रूप में देखा जा रहा है.
