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यमन में सऊदी हमलों की बढ़ती संख्या: युद्ध की स्थिति गंभीर

यमन में सऊदी अरब के हमलों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, जिससे युद्ध की स्थिति और भी गंभीर होती जा रही है। यमनी सशस्त्र बलों के प्रवक्ता ने हाल ही में 51 हवाई हमलों का खुलासा किया है। हूती लड़ाके सऊदी समर्थित बलों को चुनौती दे रहे हैं, जबकि सऊदी अरब के एफ-15 लड़ाकू विमानों की बमबारी युद्ध को और भी भयानक बना रही है। इस लेख में यमन के युद्ध क्षेत्र की जटिलताओं और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाओं पर चर्चा की गई है।
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यमन में सऊदी अरब के हमले

सऊदी अरब चारों ओर से हमलों का सामना कर रहा है और यमन पर लगातार हवाई हमले कर रहा है। यमनी सशस्त्र बलों के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल याह्या सरी ने हाल ही में एक बयान में सऊदी अरब के हमलों का खुलासा किया। उनके अनुसार, पिछले 24 घंटों में सऊदी अरब के लड़ाकू विमानों और मिसाइलों ने यमन पर 51 हवाई हमले किए। रिपोर्टों के अनुसार, खामिस मुशायद एयरबेस से उड़ान भरने वाले एफ-15 स्टेल्थ जेट्स ने आसमान से तबाही मचाई, जबकि नसान और जिजान के सैन्य ठिकानों से जमीन से जमीन पर मार करने वाले मिसाइलों से बमबारी की गई।


सऊदी सेना के इस नए आक्रामक अभियान का मुख्य लक्ष्य यमन के पांच प्रमुख प्रांत मारी, सादा, अलदैदा, ताईस और अमरान रहे। ब्रिगेडियर जनरल याह्या सरी ने यह भी बताया कि इस बमबारी के कारण आम नागरिकों के संचार नेटवर्क और बुनियादी ढांचे को गंभीर नुकसान पहुंचा है। यमन पर जारी सैन्य तनाव के चलते अब तक दागी गई मिसाइलों और हवाई हमलों की कुल संख्या 1209 तक पहुंच चुकी है।


युद्ध की स्थिति और हूती लड़ाकों की प्रतिक्रिया

जहां एक ओर हूती लड़ाके एंटी टैंक गाइडेड मिसाइलों और आधुनिक ड्रोन तकनीक का उपयोग कर सऊदी समर्थित बलों को चुनौती दे रहे हैं, वहीं सऊदी अरब के एफ-15 लड़ाकू विमानों की बमबारी यह दर्शाती है कि यमन का युद्ध एक भयानक मोड़ पर पहुंच चुका है। आने वाले दिनों में यह संघर्ष और भी भयंकर हो सकता है।


यमन के रेगिस्तानी क्षेत्रों में, अंसारुल्लाह के लड़ाके सऊदी समर्थित बलों पर भारी पड़ते हुए नजर आ रहे हैं। वे गुफाओं और जंगलों से सऊदी सेनाओं को घेरते हुए उनके टैंकरों पर हमले कर रहे हैं। कई तस्वीरें भी सामने आई हैं, जो दिखाती हैं कि कैसे हूती ईरान की रिवर्स इंजीनियरिंग से तैयार हथियारों का उपयोग कर सऊदी सेना को चुनौती दे रहे हैं।


सऊदी अरब की स्थिति और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

ईरान की रिवर्स इंजीनियरिंग से तैयार देहलविया और रूसी कॉर्नेट मिसाइलें यमन के रेगिस्तान में एक बड़ा खतरा बन चुकी हैं। सऊदी अरब के आधुनिक फाइटर जेट्स और टैंकों के मुकाबले, हूती लड़ाकों के पोर्टेबल मिसाइल स्क्वाड यह साबित करते हैं कि युद्ध केवल महंगे हथियारों से नहीं, बल्कि सही समय पर सही निशाने से भी जीते जाते हैं।


सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने अमेरिकी राष्ट्रपति से मदद मांगी थी, लेकिन हालिया रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप ने सैन्य सहायता से इनकार कर दिया। यमन के युद्ध क्षेत्र में हालात बेहद गंभीर हो चुके हैं, जो खाड़ी के युद्ध विशेषज्ञों को भी चौंका रहे हैं।