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युवाओं में सोवियत संघ और चीन के प्रति बढ़ता आकर्षण: एक नई राजनीतिक धारा

हाल के वर्षों में, पश्चिमी देशों के युवा सोवियत संघ और चीन के प्रति एक नया आकर्षण दिखा रहे हैं। यह प्रवृत्ति केवल फैशन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे सामाजिक-आर्थिक कारण भी हैं। युवा पीढ़ी आधुनिक पूंजीवादी व्यवस्था की समस्याओं से निराश होकर समाजवादी विचारधारा की ओर झुकाव महसूस कर रही है। इस लेख में हम इस बदलाव के कारणों और इसके राजनीतिक प्रभावों पर चर्चा करेंगे।
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युवाओं का सोवियत संघ की ओर झुकाव


राजनीति में श्रमिक वर्ग की वापसी एक वास्तविकता बन चुकी है, जिसे अस्थायी बहसों से नहीं रोका जा सकता। यह समझना आवश्यक है कि सोवियत संघ या चाइना-मैक्सिंग जैसी प्रवृत्तियाँ स्वतंत्र घटनाएँ नहीं हैं, बल्कि ये युवाओं की बदलती प्राथमिकताओं और राजनीतिक परिवर्तनों का संकेत हैं।


हालांकि यह चर्चा पहले भी उठ चुकी है, लेकिन पश्चिम के दक्षिणपंथी हलकों में यह चिंता का विषय बन गई है। ब्रिटेन की कंजरवेटिव पत्रिका 'द स्पेक्टेटर' में प्रकाशित एक लेख में बताया गया है कि कैसे Gen Z सोवियत संघ के प्रति आकर्षित हो रहा है।


सोवियत संघ के विघटन को लगभग चार दशक हो चुके हैं, और इस दौरान पश्चिमी बुद्धिजीवियों ने यह दावा किया कि सोवियत संघ का वैचारिक युग समाप्त हो चुका है। लेकिन अब, युवा पीढ़ी सोवियत इतिहास और संस्कृति के प्रति एक अजीब आकर्षण दिखा रही है।


लेख में यह भी बताया गया है कि आधुनिक युवा सोवियत संघ के प्रतीकों को एक 'कूल' और आकर्षक शैली के रूप में देख रहे हैं। वे सोवियत राष्ट्रगान की धुन पर वीडियो बनाते हैं और पुरानी स्लाविक शैलियों के परिधान पहनते हैं।


हालांकि, यह प्रवृत्ति केवल फैशन तक सीमित नहीं है। सामाजिक-आर्थिक कारण भी इसके पीछे हैं। कई युवा आधुनिक पूंजीवादी व्यवस्था की समस्याओं से निराश हैं और समाजवादी विचारधारा की ओर झुकाव महसूस कर रहे हैं।


चाइना-मैक्सिंग एक नया ट्रेंड है, जिसमें पश्चिमी युवा चीन की संस्कृति और जीवनशैली को अपनाने लगे हैं। यह प्रवृत्ति चीन की आर्थिक और तकनीकी उपलब्धियों के प्रति बढ़ती दिलचस्पी का संकेत देती है।


अमेरिकी समाचार एजेंसी ने बताया कि चाइना-मैक्सिंग से प्रभावित युवा पारंपरिक चीनी स्वास्थ्य पद्धतियों और जीवनशैली को अपनाने लगे हैं।


यह ट्रेंड 2025 में शुरू हुआ और 2026 में टिकटॉक और इंस्टाग्राम पर तेजी से लोकप्रिय हुआ। पश्चिमी युवा अब चीन को केवल सस्ते सामान बनाने वाले देश के रूप में नहीं देखते, बल्कि उसकी तकनीकी और सांस्कृतिक उपलब्धियों की सराहना कर रहे हैं।


इस प्रवृत्ति का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि युवा बाजार आधारित उपभोक्तावाद और सामाजिक अलगाव से असंतुष्ट हैं। वे चीन में कुछ ऐसी चीजें देखते हैं जो उनके अपने समाज में कमजोर पड़ती जा रही हैं।


पश्चिमी देशों में यह बदलाव राजनीतिक नतीजों में भी दिखने लगा है। अमेरिका में डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट्स ऑफ़ अमेरिका से जुड़े उम्मीदवारों ने हाल के चुनावों में अच्छा प्रदर्शन किया है।


यह प्रवृत्ति केवल अमेरिका तक सीमित नहीं है, बल्कि ब्रिटेन और यूरोप के अन्य हिस्सों में भी उभर रही है। खासकर कोरोना काल के बाद यह तेजी से बढ़ी है।


इन रुझानों का प्रभाव राजनीति पर भी पड़ रहा है। अमेरिका में आर्थिक मुद्दों की वापसी हो रही है, और 'श्रमिक वर्ग' का मुद्दा फिर से चर्चा में है।