यूक्रेन के ड्रोन हमले से रूस की तेल रिफाइनरी पर बड़ा असर
यूक्रेन का ड्रोन हमला
20 सितंबर को यूक्रेन ने रूस पर कई ड्रोन हमले किए, जिसमें रूस ने दावा किया कि उसने 1600 ड्रोन इंटरसेप्ट किए। इस हमले में दो लोगों की जान गई। यूक्रेन ने मॉस्को की एक तेल रिफाइनरी और सेना के लॉजिस्टिक ठिकानों को निशाना बनाया, जिससे कई इमारतों को नुकसान पहुंचा। यह हमला उस समय हुआ जब रूस में संसदीय चुनाव के लिए मतदान चल रहा था।
यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलदोमीर जेलेंस्की ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करते हुए कहा कि उन्होंने रूस की तेल रिफाइनरी और सेना के लॉजिस्टिक ठिकानों को टारगेट किया। उन्होंने बताया कि यह वही तंत्र है जहां रूस अपने रक्षा उपकरण तैयार करता है। जेलेंस्की ने हमले में इस्तेमाल किए गए हथियारों की जानकारी भी दी, जिसमें कई कामिकाजे ड्रोन शामिल थे।
मॉस्को के मेयर सरगेई सोवियान ने कहा कि रूसी एयर डिफेंस ने 1600 से अधिक ड्रोन को मार गिराया, जिनमें से 450 सीधे मॉस्को की ओर बढ़ रहे थे। उन्होंने यह भी बताया कि यह हमला चुनावों में बाधा डालने के इरादे से किया गया था।
अमेरिका का प्रभाव और भारत-चीन की स्थिति
अमेरिका के हालिया कदमों को देखते हुए भारत, रूस और चीन को जल्द ही महत्वपूर्ण निर्णय लेने की आवश्यकता है। यदि चीन ने भारत का समर्थन नहीं किया, तो दोनों देशों को नुकसान उठाना पड़ सकता है। अमेरिका ने सऊदी अरब और रूस पर हमले करवा दिए हैं, जिससे एक बड़ा तूफान आने की संभावना है।
यूक्रेन के ड्रोन हमलों के बाद मॉस्को की तेल रिफाइनरी में आग लग गई, जो क्रेमलिन से केवल 15 किलोमीटर दूर है। इस हमले के बाद अमेरिका ने यूक्रेन को 2.68 अरब डॉलर के एयर डिफेंस सिस्टम को अपग्रेड करने की मंजूरी दी। इस पैकेज में S300 और GM67 मिसाइलें शामिल हैं।
यूक्रेन की स्थिति को देखते हुए, अमेरिका लगातार उसे हथियार प्रदान कर रहा है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो रही है। यदि भारत और चीन को सऊदी अरब और रूस से कच्चा तेल मिलना बंद हो गया, तो दोनों की अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लगेगा।
