यूपी विधानसभा चुनाव से पहले सपा और कांग्रेस के बीच बयानबाजी तेज
सियासी बयानबाजी का नया दौर
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर राजनीतिक बयानबाजी में तेजी आ गई है। भाजपा जहां जीत की हैट्रिक लगाने का सपना देख रही है, वहीं मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी अपनी वापसी की उम्मीद कर रही है। इस संदर्भ में सपा नेता पहले से ही बड़े दावे करने लगे हैं, लेकिन उनके दावों की सच्चाई उनके सहयोगी कांग्रेस पार्टी के नेताओं द्वारा उजागर की जा रही है। हाल ही में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के दो मुस्लिम सांसदों के बीच बयानबाजी का मामला सामने आया है।
सपा सांसद इकरा हसन ने कहा कि यूपी में कांग्रेस अकेले कुछ खास नहीं कर सकती। उन्होंने यह भी कहा कि समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ही एकमात्र नेता हैं जो भाजपा को हरा सकते हैं। इकरा ने सोमवार को कहा कि यह बेवकूफी भरा बयान है। उनका मानना है कि अगर कोई भाजपा को हरा सकता है, तो वह केवल अखिलेश यादव हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर गठबंधन बना रहता है, तो यह अच्छा होगा, अन्यथा नुकसान कांग्रेस का होगा।
इकरा के इस बयान पर कांग्रेस के नेताओं ने तुरंत प्रतिक्रिया दी। सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा कि इकरा अकेले यह नहीं कर सकतीं। उन्होंने कहा कि इकरा हमारी भतीजी जैसी हैं, लेकिन उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस के लोग भी इसी तरह की बातें कर रहे थे। उन्होंने सपा से अपील की कि वे मिलकर इस लड़ाई को लड़ें।
कांग्रेस नेता उदित राज ने भी इकरा के दावे पर सवाल उठाए। उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा के प्रदर्शन का जिक्र किया और कहा कि राजनीति में एक और एक हमेशा दो नहीं होते। उन्होंने उदाहरण दिया कि 2024 में गठबंधन के तहत सपा ने 36 सीटें जीती थीं, जबकि 2019 में उनके पास केवल छह सांसद थे।
इस बीच, भाजपा भी इस बयानबाजी में कूद पड़ी है। उत्तर प्रदेश भाजपा के उपाध्यक्ष नीरज सिंह ने कहा कि कांग्रेस पूरे देश में अकेले कुछ भी हासिल नहीं कर पाएगी। उन्होंने कहा कि चाहे कांग्रेस सपा या किसी अन्य पार्टी के साथ गठबंधन करे, उत्तर प्रदेश की जनता ने भाजपा सरकार के साथ गठबंधन बना लिया है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब दोनों पार्टियां 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रही हैं और सीटों के बंटवारे पर विचार कर रही हैं।
