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राजकुमार भाटी का विवाद: हिंदू धर्म पर बयान और शपथ का मामला

समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राजकुमार भाटी ने हाल ही में एक वीडियो में हिंदू देवी-देवताओं की पूजा न करने की शपथ लेते हुए विवाद खड़ा किया। इसके बाद उन्होंने हिंदू धर्म पर अपने विचार साझा किए और भाजपा तथा आरएसएस पर कट्टरता का आरोप लगाया। भाटी ने स्पष्ट किया कि वह हिंदू हैं और सभी धर्मों का सम्मान करते हैं। इस विवाद के बीच उनके बयान पर राजनीतिक और सोशल मीडिया में बहस जारी है। जानें इस पूरे मामले की गहराई में क्या है।
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उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया विवाद

उत्तर प्रदेश की राजनीति: समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राजकुमार भाटी एक बार फिर अपने बयान के कारण चर्चा में हैं। हाल ही में एक वीडियो में उन्होंने ब्रह्मा, विष्णु और महेश की पूजा न करने की शपथ लेते हुए नजर आए, जिसके बाद उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। भाटी ने स्पष्ट किया है कि वह हिंदू हैं और हमेशा रहेंगे। उन्होंने हिंदू धर्म को उदार बताया और भाजपा तथा आरएसएस पर इसे कट्टरता की ओर ले जाने का आरोप लगाया है।


वीडियो के बाद उठे सवाल

राजकुमार भाटी का एक वीडियो हाल ही में सोशल मीडिया पर सामने आया, जिसमें वह कुछ लोगों के साथ हिंदू देवी-देवताओं को न मानने की शपथ लेते हुए दिखाई दिए।

इसके बाद उनके बौद्ध धर्म अपनाने के दावों ने भी जोर पकड़ा। हालांकि, भाटी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया और कहा कि उन्होंने न तो धर्म बदला है और न ही ऐसा करने का कोई इरादा है।


हिंदू धर्म पर भाटी का दृष्टिकोण

भाटी ने एक वीडियो जारी कर कहा कि वह हिंदू धर्म का सम्मान करते हैं, क्योंकि इसमें विचार-विमर्श और बहस की परंपरा है। उन्होंने भाजपा और आरएसएस पर आरोप लगाया कि वे हिंदू धर्म को कट्टरता की ओर धकेल रहे हैं।

भाटी ने यह भी कहा कि वह विभिन्न धर्मों का सम्मान करते हैं और सभी धर्मों के त्योहारों में भाग लेते हैं। उन्होंने कहा कि राजनीति में सभी जातियों और धर्मों का सम्मान करना आवश्यक है। इस विवाद के बीच उनके बयान पर राजनीतिक और सोशल मीडिया में बहस जारी है।


22 प्रतिज्ञाओं पर भाटी का स्पष्टीकरण

भाटी ने देवी-देवताओं की पूजा न करने की शपथ पर सफाई देते हुए बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर की 22 प्रतिज्ञाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वह उस कार्यक्रम में उपस्थित थे, लेकिन प्रतिज्ञाएं पढ़ने का कार्य नहीं कर रहे थे। उनके अनुसार, किसी की धार्मिक मान्यता का अलग होना यह नहीं दर्शाता कि वह दूसरे धर्म का अपमान कर रहा है।