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राजकोट में सेक्स स्टैमिना दवाओं के नाम पर ठगी का खुलासा

गुजरात के राजकोट में सेक्स स्टैमिना बढ़ाने वाली दवाओं के नाम पर ठगी करने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। पुलिस ने तीन अवैध कॉल सेंटरों पर छापेमारी कर 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। ये ठग डॉक्टर बनकर ग्राहकों को फंसाते थे और अश्लील सामग्री भेजकर पैसे वसूलते थे। इस मामले में 2,000 लोगों को निशाना बनाए जाने का दावा किया गया है। पुलिस अब आरोपियों के बैंक खातों और कॉल डिटेल्स की जांच कर रही है।
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राजकोट में ठगी का मामला

राजकोट। गुजरात के राजकोट में सेक्स स्टैमिना बढ़ाने वाली दवाओं के नाम पर ठगी करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। ये ठग डॉक्टर बनकर ऑनलाइन ग्राहकों को फंसाते थे। इसके बाद, वे अश्लील सामग्री भेजकर दवाएं खरीदने के लिए मजबूर करते थे और इनकार करने पर परिवार के सामने बदनाम करने की धमकी देते थे। इस मामले में 2,000 लोगों को निशाना बनाए जाने का दावा किया गया है, जिसकी जांच जारी है।


पुलिस की कार्रवाई

राजकोट ग्रामीण की भायावदर पुलिस ने 22 अक्टूबर को शहर में तीन अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी कर तीन अवैध कॉल सेंटरों का भंडाफोड़ किया। इस कार्रवाई में 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि पांच अन्य की तलाश जारी है। पुलिस ने कंप्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल फोन समेत कुल 5,16,700 रुपये का सामान जब्त किया है।


आरोपियों का तरीका

आरोपियों ने बिना लाइसेंस और वैध दस्तावेजों के अपने कार्यालय खोले थे। वे कंप्यूटर, इंटरनेट और मोबाइल फोन के जरिए लोगों से संपर्क करते थे। सेक्स स्टैमिना बढ़ाने वाले आयुर्वेदिक उत्पादों और विटामिन बी12 की दवाओं की बिक्री के नाम पर खुद को डॉक्टर बताते थे। पुलिस के अनुसार, आरोपी फर्जी नामों का उपयोग कर ग्राहकों का विश्वास जीतते थे और फिर उन्हें अपने जाल में फंसाते थे।


धमकी और दबाव

पुलिस की प्रारंभिक जांच में आरोपियों के काम करने का तरीका सामने आया है। मुख्य आरोपी खोडीदास मकड़िया ने अपने घर में कंप्यूटर लैब बना रखी थी। वह बिना वैध लाइसेंस के लोगों को काम पर रखकर सेक्स स्टैमिना और बी12 की दवाएं बेचने के नाम पर फर्जी डॉक्टर के तौर पर काम करता था। गिरोह के सदस्य सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों से संपर्क करते और उन्हें 'bedroomboss' वेबसाइट के जरिए अश्लील सामग्री भेजते थे। इसके बाद ग्राहकों को उत्पाद खरीदने के लिए उकसाया जाता था। यदि कोई व्यक्ति दवा से लाभ नहीं होने की बात कहता या खरीदने से मना करता, तो आरोपी उसे अश्लील सामग्री देखने की बात परिवार वालों को बताने की धमकी देते थे।


गिरोह की पहचान

तीसरे गिरोह का संचालक हार्दिक खामभला बताया गया है। वह अपने साथियों के साथ मिलकर 'न्यूरो शक्ति प्लस' नामक दवा बेचने के बहाने फर्जी पहचान का इस्तेमाल कर लोगों से ठगी करता था। पुलिस की छापेमारी से पहले ही इस गिरोह के आरोपी फरार हो गए। उन्हें वांछित घोषित किया गया है और उनकी तलाश की जा रही है।


कानूनी कार्रवाई

भायावदर पुलिस स्टेशन में आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 319(2), 308(2), 351(4) और 3(5) के साथ आईटी एक्ट तथा गुजरात मेडिकल प्रैक्टिशनर एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अब आरोपियों के बैंक खातों और कॉल डिटेल्स की जांच कर रही है। इसका उद्देश्य कथित ठगी के पूरे नेटवर्क का पता लगाना है।