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राज्यसभा चुनाव की तारीख का ऐलान: यूपी और उत्तराखंड में 16 अक्टूबर को होगा मतदान

उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में राज्यसभा चुनाव की तारीख 16 अक्टूबर निर्धारित की गई है। इस चुनाव में यूपी की 10 और उत्तराखंड की 1 सीट पर मतदान होगा। भाजपा, सपा और बसपा के सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, जिससे राजनीतिक गतिविधियों में तेजी आई है। जानें चुनाव प्रक्रिया, सीटों का गणित और संभावित परिणाम के बारे में।
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राजनीतिक गतिविधियों में तेजी


नई दिल्ली: राजनीतिक जगत में हलचल बढ़ गई है, क्योंकि उत्तर प्रदेश की 10 और उत्तराखंड की एक राज्यसभा सीट के लिए चुनाव की तिथि घोषित कर दी गई है। मतदान 16 अक्टूबर को होगा और उसी दिन परिणाम भी सामने आएंगे। उल्लेखनीय है कि यूपी की इन 10 सीटों का मौजूदा कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त हो रहा है। इनमें से 8 सीटें भाजपा के पास हैं, जबकि सपा और बसपा के पास एक-एक सीट है।


समाप्त हो रहे कार्यकाल वाले सदस्य

भाजपा के जिन राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, उनमें पूर्व डीजीपी बृजलाल, सीमा द्विवेदी, नीरज शेखर, गीता शाक्य, हरदीप सिंह पुरी, अरुण सिंह और बीएल वर्मा शामिल हैं। ध्यान देने योग्य बात यह है कि डॉ. दिनेश शर्मा का कार्यकाल भी 25 नवंबर तक था, लेकिन अंडमान निकोबार के उपराज्यपाल बनने के बाद उन्होंने पहले ही इस्तीफा दे दिया था, जिससे उनकी सीट पर भी चुनाव होगा। इसके अतिरिक्त, सपा के राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव और बसपा के रामजी गौतम का कार्यकाल भी इसी समय समाप्त हो रहा है।


चुनाव प्रक्रिया का समय

राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया को समझने के लिए, अधिसूचना जारी होने के बाद लगभग 7 से 8 दिनों तक नामांकन दाखिल करने का समय होता है। नामांकन समाप्त होने के अगले दिन पर्चों की जांच होती है, और उसके दो दिन बाद नाम वापस लेने का अवसर दिया जाता है। नाम वापसी के लगभग 7 दिन बाद मतदान की तिथि निर्धारित होती है, और उसी दिन शाम तक परिणाम भी घोषित कर दिए जाते हैं।


यूपी में सीटों का गणित

अब यूपी में राज्यसभा चुनाव के गणित पर चर्चा करते हैं। प्रदेश की विधानसभा में कुल 403 सीटें हैं, लेकिन पिछले एक साल में 6 विधायकों के निधन के कारण अब केवल 397 सदस्य ही इन 10 सीटों के लिए वोट डाल सकेंगे। नियमों के अनुसार, राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए (कुल विधायक भाग रिक्त सीटें + 1, फिर उसमें 1 जोड़कर) यह फॉर्मूला अपनाया जाता है, जिसके अनुसार प्रदेश में एक सीट के लिए लगभग 37 वोटों की आवश्यकता होगी। ध्यान दें कि विधानसभा में बसपा का कोई सदस्य नहीं है, और राज्यसभा में उसके एकमात्र सदस्य का कार्यकाल समाप्त होते ही उसकी संख्या भी शून्य हो जाएगी।


समाजवादी पार्टी के पास विधानसभा में 101 सीटें हैं, जिससे वह आसानी से 2 सीटें जीत सकती है, और इसके बाद भी उसके पास 7 अतिरिक्त वोट बचेंगे। यदि कांग्रेस के 2 विधायकों का समर्थन मिल जाता है, तो यह संख्या बढ़कर 9 हो जाएगी। वहीं भाजपा के पास 256 विधायक हैं, और सहयोगी दलों को मिलाकर यह आंकड़ा 289 तक पहुंचता है, जिससे भाजपा के 7 सदस्यों की जीत लगभग सुनिश्चित मानी जा रही है।