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राज्यसभा में जन्म और मृत्यु पंजीकरण विधेयक की मंजूरी: जानें इसके महत्वपूर्ण पहलू

राज्यसभा ने मंगलवार को जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 को ध्वनिमत से मंजूरी दी। यह विधेयक पहले ही लोकसभा से पारित हो चुका था। चर्चा के दौरान विपक्ष ने हंगामा किया और केंद्रीय गृह मंत्री की उपस्थिति की मांग की। सरकार ने स्पष्ट किया कि पंजीकरण प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन एक वर्ष से अधिक देरी पर न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश आवश्यक होगा। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री ने कहा कि सरकार सटीक रिकॉर्ड सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
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नई दिल्ली में जन्म और मृत्यु पंजीकरण विधेयक पर चर्चा


नई दिल्ली: मंगलवार को राज्यसभा ने जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 को ध्वनिमत से स्वीकृति प्रदान की। यह विधेयक पहले ही 31 जुलाई को लोकसभा में पारित हो चुका था। सदन में इस विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्ष ने हंगामा किया और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति की मांग की। विपक्षी सांसदों ने अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की गड़बड़ी का मुद्दा उठाते हुए नारेबाजी की, लेकिन शोर-शराबे के बीच विधेयक को मंजूरी मिल गई।


पंजीकरण प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं

सरकार ने स्पष्ट किया है कि जन्म और मृत्यु के पंजीकरण की मौजूदा व्यवस्था में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। यदि जन्म या मृत्यु की सूचना 21 दिनों के भीतर दी जाती है, तो सामान्य प्रक्रिया के तहत पंजीकरण होगा। वहीं, 21 दिन से लेकर एक वर्ष तक की देरी होने पर निर्धारित नियमों और विलंब शुल्क के साथ रजिस्ट्रेशन कराया जा सकेगा।


पंजीकरण के लिए न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश आवश्यक

हालांकि, संशोधन के अनुसार एक वर्ष से अधिक और दो वर्ष तक की देरी से पंजीकरण कराने के लिए जिला मजिस्ट्रेट (DM), उप-मंडल मजिस्ट्रेट (SDM) या उनके द्वारा अधिकृत अधिकारी की अनुमति अनिवार्य होगी। यदि किसी जन्म या मृत्यु का पंजीकरण दो वर्ष से अधिक समय बाद कराया जाता है, तो इसके लिए न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश की आवश्यकता होगी। इसके साथ ही संबंधित अधिकारी को आवेदन के साथ जमा किए गए दस्तावेजों और तथ्यों का सत्यापन भी करना होगा, ताकि रिकॉर्ड की प्रमाणिकता सुनिश्चित की जा सके।


सरकार का दृष्टिकोण

सरकार का कहना है कि समय पर जन्म पंजीकरण बच्चों को शिक्षा, पहचान पत्र, सरकारी योजनाओं और अन्य कानूनी अधिकारों का लाभ दिलाने के लिए अत्यंत आवश्यक है। इसी तरह, मृत्यु का सही रिकॉर्ड प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाओं को पारदर्शी बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।


केंद्रीय गृह राज्य मंत्री का बयान

विधेयक पर चर्चा का उत्तर देते हुए केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि सरकार देश में प्रत्येक जन्म और मृत्यु का सटीक रिकॉर्ड सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी कहा कि इससे रिकॉर्ड प्रणाली अधिक पारदर्शी होगी और गलत या फर्जी प्रविष्टियों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। विपक्ष ने सदन में विस्तृत चर्चा की मांग की और कहा कि प्रधानमंत्री तथा गृह मंत्री को सदन में उपस्थित होकर जवाब देना चाहिए।