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राम मंदिर चढ़ावे चोरी पर सपा और भाजपा के बीच राजनीतिक टकराव

राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी की घटना ने सियासी हलचल पैदा कर दी है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस मामले में सरकार पर आरोप लगाए हैं, जबकि डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने पलटवार करते हुए अखिलेश पर राजनीति करने का आरोप लगाया है। इस विवाद में चंपत राय और अन्य ट्रस्ट सदस्यों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। जानिए इस राजनीतिक टकराव के पीछे की पूरी कहानी।
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राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप

लखनऊ। राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव इस मामले में सरकार पर निशाना साध रहे हैं। इस पर डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने पलटवार करते हुए अखिलेश पर राजनीति करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि सपा के शासनकाल में निहत्थे रामभक्तों का खून बहा था, जिसे अखिलेश को याद रखना चाहिए।


सरकार की जांच प्रक्रिया

डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने सोशल मीडिया पर लिखा कि भगवान श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले में सरकार और ट्रस्ट दोनों की ओर से जांच जारी है। उन्होंने कहा कि कुछ भी छिपाया नहीं जा रहा है। ऐसे में सपा के नेता अखिलेश यादव अपनी ओछी राजनीति के चलते श्रीराम मंदिर पर भ्रामक बयानबाजी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम के नाम पर राजनीति नहीं, बल्कि सत्यनिष्ठा और जवाबदेही की आवश्यकता है।


अखिलेश यादव का आरोप

यह ध्यान देने योग्य है कि राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी की घटना को सबसे पहले अखिलेश यादव ने उजागर किया था। इसके बाद से कई सवाल उठने लगे और राजनीतिक हलचल तेज हो गई। अखिलेश ने इस मुद्दे पर बीजेपी सरकार को भी घेरा था। इसके परिणामस्वरूप आठ आरोपियों के खिलाफ नामजद और अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई और उनकी गिरफ्तारी भी हुई।


चंपत राय और अन्य की भूमिका पर सवाल

चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव की भूमिका पर उठ रहे सवाल
इस घटना के बाद चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठ रही है। चंपत राय और अनिल मिश्रा ने ट्रस्ट से इस्तीफा दे दिया है, लेकिन अभी तक इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। विपक्ष के नेता चंपत राय की भूमिका पर लगातार सवाल उठा रहे हैं।