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रामलीला समितियों की बैठक में सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण पर चर्चा

नई दिल्ली में आयोजित रामलीला समितियों की बैठक में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने रामलीला के महत्व और इसके संरक्षण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह आयोजन भारतीय संस्कृति का प्रतीक है और सभी की जिम्मेदारी है कि इसे नई पीढ़ी तक पहुंचाएं। बैठक में विभिन्न प्रतिनिधियों ने रामलीला के आयोजन के लिए आवश्यक सुविधाओं की मांग की और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण पर विचार-विमर्श किया। जानें इस बैठक में क्या-क्या चर्चा हुई और रामलीला समितियों की भूमिका क्या है।
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नई दिल्ली में रामलीला समितियों की महत्वपूर्ण बैठक


नई दिल्ली में संसद भवन में देशभर की रामलीला समितियों के प्रतिनिधियों की एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। इस अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि रामलीला केवल एक धार्मिक या सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह भारत की प्राचीन परंपरा, नैतिक मूल्यों और सामाजिक जागरूकता का प्रतीक है। उन्होंने इस परंपरा के संरक्षण और इसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने की जिम्मेदारी सभी पर डाली।


महासंघ की मांगें

बैठक में चांदनी चौक से सांसद प्रवीन खंडेलवाल, श्री रामलीला महासंघ के अध्यक्ष अर्जुन कुमार, महामंत्री सुभाष गोयल और अन्य प्रतिनिधि उपस्थित थे। अर्जुन कुमार ने कहा कि दिल्ली में रामलीला का एक समृद्ध इतिहास है और सरकारी एजेंसियों द्वारा आयोजन के लिए मैदान उपलब्ध कराए जाते हैं। उन्होंने दिल्ली विकास प्राधिकरण से अनुरोध किया कि वे रामलीला के लिए अपने मैदान मुफ्त में उपलब्ध कराएं और बिजली की सुविधा भी प्रदान करें। इससे समितियों को आर्थिक सहायता मिलेगी और सांस्कृतिक परंपरा को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।


रामलीला की सामाजिक भूमिका

ओम बिरला ने अपने संबोधन में कहा कि रामलीला की परंपरा ने भारतीय समाज को मर्यादा, त्याग, सेवा, कर्तव्य और राष्ट्रभक्ति जैसे मूल्यों से जोड़ा है। उन्होंने बताया कि रामलीला समितियां भारतीय संस्कृति और लोक परंपराओं की महत्वपूर्ण वाहक हैं। आधुनिक युग में इन परंपराओं को जीवित रखने के लिए तकनीकी नवाचार और जनभागीदारी को बढ़ावा देना आवश्यक है।


उन्होंने यह भी कहा कि रामलीला समाज के विभिन्न वर्गों को एक मंच पर लाने का कार्य करती है, जिससे सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक चेतना को बल मिलता है।


सांसद प्रवीन खंडेलवाल के विचार

सांसद प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि रामलीला भारत की सांस्कृतिक आत्मा का उत्सव है। यह केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता और राष्ट्रीय चरित्र का प्रतीक है। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष की रामलीला समितियों के प्रति प्रतिबद्धता की सराहना की और विश्वास जताया कि ओम बिरला के मार्गदर्शन में समितियों को नई दिशा मिलेगी।


बैठक में विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव साझा किए और रामलीला के संरक्षण, तकनीकी उपयोग, युवा पीढ़ी की भागीदारी और सांस्कृतिक विरासत के प्रचार पर चर्चा की। कार्यक्रम के अंत में रामलीला महासंघ ने ओम बिरला को गदा और रामायण की प्रति भेंट कर सम्मानित किया।