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राहुल गांधी की अनुपस्थिति पर उठे सवाल, सोनम वांगचुक का अनशन जारी

जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक के अनशन और राहुल गांधी की अनुपस्थिति ने नई राजनीतिक बहस को जन्म दिया है। वांगचुक के आंदोलन के बीच राहुल गांधी 'छात्रों की गूंज' अभियान के अगले चरण की तैयारी कर रहे हैं। जानें इस मुद्दे पर कांग्रेस और CJP की क्या प्रतिक्रियाएं हैं और आगे की रणनीति क्या होगी।
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नई दिल्ली में राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र


नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक के अनशन और राहुल गांधी की अनुपस्थिति ने राजनीतिक बहस को जन्म दिया है। विपक्ष के नेता के विरोध स्थल पर न पहुंचने पर सवाल उठाए गए, जिन पर वांगचुक, कांग्रेस और CJP की ओर से विभिन्न प्रतिक्रियाएं आईं। इस बीच, राहुल गांधी अपने 'छात्रों की गूंज' अभियान के अगले चरण की तैयारी कर रहे हैं, जिसमें बेरोजगारी, पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली जैसे मुद्दे शामिल होंगे।


सोनम वांगचुक का अनशन और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

लगभग तीन सप्ताह से जंतर-मंतर पर CJP के आंदोलन के तहत सोनम वांगचुक भूख हड़ताल पर हैं। राहुल गांधी के उनसे न मिलने पर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गईं। वांगचुक ने इस पर टिप्पणी की, जबकि कांग्रेस नेताओं ने कहा कि पार्टी लगातार छात्रों और युवाओं के मुद्दों को उठाती रही है। CJP ने भी केंद्र सरकार की जवाबदेही पर जोर दिया है।


'छात्रों की गूंज' का अगला कार्यक्रम देहरादून में

राहुल गांधी 17 जुलाई को देहरादून में 'छात्रों की गूंज' अभियान के अगले कार्यक्रम में भाग लेंगे। पहले यह आयोजन परेड ग्राउंड में होना था, लेकिन प्रशासन द्वारा अनुमति वापस लेने के बाद इसे बन्नू स्कूल ग्राउंड में आयोजित किया जाएगा। राहुल ने इस निर्णय पर वीडियो जारी कर केंद्र सरकार पर ध्यान भटकाने का आरोप लगाया और बेरोजगारी को देश का सबसे बड़ा मुद्दा बताया।


कांग्रेस और CJP की दलीलें

गुजरात कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष जिग्नेश मेवाणी ने कहा कि कांग्रेस ने कभी भी वांगचुक या आंदोलन कर रहे युवाओं की आलोचना नहीं की। उन्होंने NSUI और यूथ कांग्रेस के आंदोलनों का हवाला देते हुए कहा कि पार्टी लगातार पेपर लीक और छात्रों के अधिकारों की लड़ाई लड़ रही है। उनका कहना है कि कांग्रेस का अभियान और वांगचुक का आंदोलन एक-दूसरे के पूरक हैं।


CJP का सरकार से जवाब मांगने का जोर

CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने कहा कि असली सवाल यह है कि सरकार आंदोलनकारियों से बातचीत क्यों नहीं कर रही और शिक्षा मंत्री से जवाबदेही क्यों नहीं तय की जा रही। संगठन ने 20 जुलाई तक सरकार से जवाब की उम्मीद जताई है। उसी दिन संसद के मॉनसून सत्र की शुरुआत पर जंतर-मंतर से संसद तक मार्च निकालने की योजना बनाई गई है।


आगे की रणनीति पर ध्यान

राहुल गांधी देहरादून के बाद स्वतंत्रता दिवस से पहले 'छात्रों की गूंज' अभियान के तहत चार और कार्यक्रम करने की योजना बना रहे हैं। दूसरी ओर, CJP ने स्पष्ट किया है कि वह अपने आंदोलन को जारी रखेगा और विभिन्न विपक्षी नेताओं के समर्थन के बावजूद इसे जनता के मुद्दों का आंदोलन मानता है। आने वाले दिनों में दोनों पक्षों की गतिविधियों पर राजनीतिक नजरें टिकी रहेंगी।