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राहुल गांधी की टिप्पणी पर विदेश मंत्रालय ने इटली के साथ संबंधों को बताया मजबूत

राहुल गांधी की हालिया टिप्पणी ने राजनीतिक हलचल पैदा कर दी है, जिसके जवाब में विदेश मंत्रालय ने भारत और इटली के बीच मजबूत संबंधों की पुष्टि की है। प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि कूटनीतिक प्रोटोकॉल का पालन करना आवश्यक है। इस विवाद में भाजपा नेताओं ने राहुल की आलोचना की है, जबकि विश्लेषकों ने सकारात्मक विपक्ष की आवश्यकता पर जोर दिया है। जानें इस मुद्दे पर और क्या कहा गया है।
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सियासी माहौल में गर्मी

नई दिल्ली- लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की भारत की विदेश नीति और प्रधानमंत्री मोदी पर की गई व्यक्तिगत टिप्पणी ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। इस विवाद के बीच, विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को भारत और इटली के बीच मजबूत संबंधों और कूटनीतिक प्रोटोकॉल के महत्व पर जोर दिया।


विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में राहुल गांधी के मजाकिया अंदाज पर उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए कहा, “हमारे इटली के साथ मजबूत संबंध हैं। पिछले कुछ वर्षों में, हमारे संबंध हर दृष्टि से बढ़े हैं। यह आवश्यक है कि हम एक-दूसरे का सम्मान करते हुए और आपसी समझ के साथ द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करें।”


गौरतलब है कि राहुल गांधी ने गुरुवार को नई दिल्ली में एक कार्यक्रम में कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित के साथ गले मिलकर पीएम मोदी के विदेशी नेताओं से गले मिलने का मजाक उड़ाया। इसके साथ ही, उन्होंने भारत की विदेश नीति पर भी सवाल उठाए। इसके बाद, संदीप दीक्षित ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के बारे में ऐसी बातें कहीं, जिन्हें आलोचकों ने अशिष्ट और गलत बताया। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने इस बयान की निंदा की है। आलोचकों का कहना है कि विपक्ष को केंद्र सरकार की कूटनीतिक रणनीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर सवाल उठाने का अधिकार है, लेकिन यह आलोचना तथ्यों और नीतियों पर आधारित होनी चाहिए, न कि दिखावटी संकेतों पर।


भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने राहुल गांधी की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि उनकी बातें विपक्ष के नेता के रूप में कम और एक विफल स्टैंडअप कॉमेडियन के रूप में ज्यादा लगती हैं। उन्होंने राहुल गांधी पर “लॉकर-रूम की बातें और घटिया इशारे” करने का आरोप लगाया। इसके अलावा, भाजपा नेता शहजाद पूनावाला ने भी सवाल उठाया कि राजनीतिक बहस कितनी नीचे गिर सकती है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी से असहमति होना पूरी तरह से जायज है, लेकिन एक विदेशी महिला नेता को इसमें घसीटना न तो समझदारी है और न ही नेतागिरी। विश्लेषकों का कहना है कि सकारात्मक विपक्ष का मतलब यह होना चाहिए कि सरकार को बेरोजगारी, आर्थिक नीतियों, राष्ट्रीय सुरक्षा, कूटनीति और शासन पर जवाबदेह ठहराया जाए। राहुल गांधी के पास यही करने का संवैधानिक अधिकार है।