राहुल गांधी की रैली पर सोनिया गांधी की सलाह का असर
रैली की योजना और राजनीतिक चर्चाएँ
हालांकि इस बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन चर्चा है कि सोनिया गांधी ने दिवाली से पहले दिल्ली में रैली आयोजित न करने की सलाह दी थी। हाल ही में यह भी जानकारी मिली थी कि 13 अक्टूबर को राहुल गांधी के घर पर हुई चाय पार्टी में यह तय हुआ था कि दिवाली तक कोई प्रदर्शन नहीं किया जाएगा ताकि आम जनता को असुविधा न हो। इसके बावजूद, अचानक एक नवंबर को रैली का आयोजन करने की योजना बनाई गई। भाजपा का तंत्र इस बात को प्रचारित कर रहा है कि सोनिया गांधी समझदारी से राजनीति कर रही थीं, जबकि राहुल गांधी की शैली को मनमानी कहा जा रहा है। यह भी कहा जा रहा है कि राहुल को बिना थ्रिल के राजनीति करना पसंद नहीं है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि राहुल की चाय पार्टी में यह निर्णय लिया गया था कि दशहरा और दिवाली के दौरान लोगों की सुविधाओं का ध्यान रखते हुए प्रदर्शन स्थगित कर दिए जाएं। लेकिन इसके बावजूद कई संगठनों ने प्रदर्शन जारी रखा। जनता पार्टी और कम्युनिस्ट पार्टियों ने भी अपनी आवाज उठाई। इस बीच, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण में नई गड़बड़ियों की खबरें सामने आईं, खासकर कर्नाटक, दिल्ली और उत्तर प्रदेश में। इसलिए कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने तय किया कि अगर एक महीने का समय दिया गया तो यह मामला पीछे चला जाएगा। सरकार भी न्यूज साइकिल को बदलने के लिए कई उपाय कर रही है, इसलिए रामलीला मैदान में रैली का आयोजन किया गया।
