राहुल गांधी के कार्यक्रमों का विरोध: भाजपा की रणनीति या संयोग?
भाजपा का विरोध और राहुल गांधी की रैलियां
भारतीय जनता पार्टी और उसकी सरकारों ने यह तय कर लिया है कि वे राहुल गांधी के हर कार्यक्रम का विरोध करेंगे, भले ही इससे उन्हें लाभ ही क्यों न हो। यह एक अजीब स्थिति है, क्योंकि कांग्रेस के लिए यह सुखद आश्चर्य है कि राहुल गांधी पिछले एक महीने से लगातार रैलियों और राजनीतिक कार्यक्रमों में सक्रिय हैं। 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम देश के विभिन्न हिस्सों में आयोजित किया जा रहा है, जिसमें भाजपा की मदद से सफलता भी मिल रही है।
हाल ही में मध्य प्रदेश के इंदौर में राहुल गांधी के कार्यक्रम का मामला सामने आया। कांग्रेस ने नेहरू स्टेडियम में 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के लिए अनुमति मांगी, लेकिन जिला प्रशासन ने इसे अस्वीकार कर दिया। यह ध्यान देने योग्य है कि राहुल गांधी को देहरादून, प्रयागराज और पुणे में भी इसी तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ा था।
हर बार उनके कार्यक्रम की पहली बार में मंजूरी नहीं दी जाती, जिसके बाद कांग्रेस कार्यकर्ता विरोध करते हैं। इस प्रक्रिया के बाद ही राहुल के कार्यक्रम की अनुमति मिलती है। ऐसा प्रतीत होता है कि अधिकारियों को डर है कि यदि उन्होंने पहली बार में अनुमति दी, तो उच्च अधिकारियों की नाराजगी का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए, यह एक प्रथा बन गई है कि उनके कार्यक्रमों की मंजूरी रोकी जाती है।
