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राहुल गांधी के खिलाफ हल्द्वानी में जातिगत टिप्पणी का मामला दर्ज

उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ एक विवादास्पद शुद्धिकरण घटना को लेकर FIR दर्ज की गई है। इस मामले में आरोप है कि उन्होंने जातिगत शब्दों का इस्तेमाल किया, जिससे दलित समुदाय की भावनाएं आहत हुईं। श्रीराम सेना के सदस्यों ने गांधी पर जातिगत रंग देने का आरोप लगाया है। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और इसके पीछे की राजनीति।
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हल्द्वानी में शुद्धिकरण विवाद


हल्द्वानी में शुद्धिकरण विवाद: उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस नेताओं के एक कार्यक्रम के बाद शुद्धिकरण का मामला चर्चा का विषय बन गया है। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने इस घटना को छुआछूत और दलितों के अपमान से जोड़ा और इसकी कड़ी निंदा की। अब श्रीराम सेना के सदस्यों ने राहुल गांधी पर आरोप लगाया है कि उन्होंने इस घटना को जातिगत रंग देने का प्रयास किया है, जिससे सामाजिक माहौल प्रभावित हुआ है।


सूत्रों के अनुसार, हल्द्वानी शुद्धिकरण मामले में राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद यह कार्रवाई की गई। उनके खिलाफ हल्द्वानी कोतवाली में SC/ST एक्ट और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। यह मामला श्रीराम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास के पदाधिकारियों की शिकायत के आधार पर सामने आया है। हल्द्वानी के दो दलित पदाधिकारियों—विनोद आर्य और अमित कुमार ने पुलिस को तहरीर देकर आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने हाल ही में अपनी प्रेस वार्ता में अनुसूचित जाति के खिलाफ आपत्तिजनक और जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया।


पुलिस ने रविवार को बताया कि हल्द्वानी में वाल्मीकि समुदाय के एक सदस्य की शिकायत पर राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। शिकायत में कहा गया है कि कांग्रेस नेता ने AICC प्रमुख के कार्यक्रम स्थल पर हुई एक धार्मिक रस्म को जातिवादी रंग दिया।


यह FIR भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज की गई है, जो समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के इरादे से किए गए जानबूझकर कार्यों से संबंधित है। पुलिस ने बताया कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 भी लागू किया गया है।


जवाहर नगर के निवासी और श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास के सदस्य अमित कुमार ने हल्द्वानी पुलिस स्टेशन में दर्ज शिकायत में कहा कि वह "रस्म और सफाई अभियान" के दौरान मौजूद थे और 29 अगस्त को दिल्ली में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में गांधी की टिप्पणियों से समुदाय की भावनाएं आहत हुईं।