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राहुल गांधी ने चुनाव आयुक्त पर उठाए गंभीर आरोप, सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों का किया हवाला

राहुल गांधी ने चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उन्होंने मतदाता पंजीकरण के फॉर्म 6 में अवैध बदलाव किए हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों का हवाला देते हुए कहा कि यह भाजपा की मदद के लिए उनके पद का दुरुपयोग है। इस विवाद में निर्वाचन आयोग के पुराने बयानों और सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी पर भी सवाल उठाए गए हैं। जानें इस मामले में आगे क्या हो रहा है और अदालत ने क्या निर्देश दिए हैं।
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राहुल गांधी का चुनाव आयुक्त पर हमला


नई दिल्ली। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार ने मतदाता पंजीकरण से संबंधित फॉर्म 6 में अवैध और एकतरफा बदलाव किए हैं। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों के बाद यह बात स्पष्ट हो गई है।


सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों का संदर्भ



सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर राहुल गांधी ने कहा कि यह अब बिना किसी संदेह के स्थापित हो गया है कि ज्ञानेश कुमार ने फॉर्म 6 में अवैध बदलाव किए। यह भाजपा की सहायता के लिए उनके पद के दुरुपयोग का एक और प्रमाण है। उन्होंने निर्वाचन आयोग की एक पुरानी प्रेस विज्ञप्ति की तस्वीर भी साझा की।


सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी का विवाद

क्या सुप्रीम कोर्ट ने दी थी संशोधित फॉर्म 6 को मंजूरी?
यह विवाद तब और बढ़ा जब सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसने नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए संशोधित फॉर्म 6 को मंजूरी नहीं दी है। यह फॉर्म विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान नए मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में जोड़ने के लिए उपयोग किया जाता है।


मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान कहा कि किसी भी संशोधित फॉर्म 6 को हमने मंजूरी नहीं दी है। यह स्पष्ट है। रिकॉर्ड सामने आने पर हम देखना चाहेंगे कि इसमें बदलाव किसने किया?


निर्वाचन आयोग के पुराने बयान पर उठे सवाल

निर्वाचन आयोग ने 26 सितंबर को एक बयान में कहा था कि एसआईआर के लिए फॉर्म 6 के साथ जोड़ी गई घोषणा को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा था। आयोग ने कहा था कि एसआईआर से अलग अवधि में निर्वाचक पंजीकरण नियम, 1960 के तहत निर्धारित फॉर्म का उपयोग किया जाएगा।


कॉकरोच जनता पार्टी के कार्यकर्ता आशुतोष रांका ने दावा किया कि आयोग ने बाद में यह प्रेस विज्ञप्ति हटा ली। उन्होंने सोशल मीडिया पर आयोग की ओर से प्रेस विज्ञप्ति हटाए जाने पर टिप्पणी की और ज्ञानेश कुमार पर भी निशाना साधा। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने का एकतरफा अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि पहले निर्वाचन आयोग और अन्य संबंधित पक्षों को सुना जाना जरूरी है।


मुख्य चुनाव आयुक्त के निलंबन की मांग

सीईसी के निलंबन की मांग पर क्या हुआ?
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने केंद्र, निर्वाचन आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी, उप चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग तथा महानिदेशक सूचना प्रौद्योगिकी सीमा खन्ना को नोटिस जारी किया। पीठ ने कहा कि पहले मामले में प्रमाणित जानकारी सामने आनी चाहिए। अदालत ने कहा कि अगर जरूरत हुई तो किसी फैसले को बाद में रद्द किया जा सकता है।


याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने मुख्य चुनाव आयुक्त को तत्काल निलंबित करने की मांग की। उन्होंने दावा किया कि एसआईआर से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले दोनों अन्य निर्वाचन आयुक्तों की आपत्तियों के बावजूद एकतरफा तरीके से लिए गए।


अदालत की टिप्पणियाँ और आगे की प्रक्रिया

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि वैधानिक व्यवस्था का पालन जरूरी है और अगर इसका उल्लंघन हुआ है तो अदालत संबंधित फैसले को रद्द कर सकती है। न्यायमूर्ति बागची ने भी सवाल किया कि निर्वाचन आयोग को सुने बिना ऐसी राहत कैसे दी जा सकती है।


याचिका में दावा किया गया है कि अक्तूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कम से कम 14 मौकों पर एसआईआर से जुड़े फैसलों और प्रक्रियाओं पर आपत्तियां दर्ज की थीं।


फॉर्म 6 में बदलाव पर आपत्तियाँ

याचिका में फॉर्म 6 में बदलाव को लेकर भी आपत्तियों का उल्लेख किया गया है। दावा है कि निर्वाचन आयुक्त विवेक जोशी ने कहा था कि एसआईआर से जुड़ी जानकारी लेने के लिए फॉर्म 6 में बदलाव करने से पहले निर्वाचक पंजीकरण नियम, 1960 में संशोधन जरूरी होगा।


इसके अलावा, पश्चिम बंगाल में कुछ मतदाताओं को शामिल करने के न्यायिक अधिकारियों के निर्देश के खिलाफ निर्वाचन आयोग के नाम से अपील दायर किए जाने का मुद्दा भी उठाया गया है।


याचिका में मांगी गई राहत

याचिका में क्या मांग की गई?
याचिका में चुनावी सूची से जुड़े आंकड़ों और उनके रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने, फॉर्म 6 में आगे किसी महत्वपूर्ण बदलाव पर रोक लगाने और मामले की सुनवाई पूरी होने तक आंकड़ों में अपरिवर्तनीय बदलाव से सुरक्षा की मांग की गई है।


मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष अभी नहीं आया है। सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है और कहा है कि रिकॉर्ड मिलने के बाद ही आरोपों पर आगे विचार किया जाएगा।