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राहुल गांधी ने टाटा संस विवाद में उठाए सवाल, सरकार पर लगाया गंभीर आरोप

राहुल गांधी ने टाटा संस के कार्यकारी चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए भाजपा सरकार की आलोचना की है। उन्होंने आरोप लगाया कि पीएम मोदी और अमित शाह भारतीय व्यवसायों को अपने खिलौने की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। नोएल टाटा ने भी इस मामले में प्रक्रियात्मक अनियमितताओं का आरोप लगाया है। जानें इस विवाद की पूरी कहानी और राहुल गांधी के बयान के पीछे की सच्चाई।
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टाटा संस विवाद में राहुल गांधी की एंट्री


टाटा संस विवाद: एन. चंद्रशेखरन की टाटा संस के कार्यकारी चेयरमैन के रूप में पुनर्नियुक्ति के मामले में राहुल गांधी ने अपनी आवाज उठाई है। उन्होंने भाजपा सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि कारोबारी नेता इस मुद्दे पर चुप हैं। राहुल ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह भारतीय व्यवसायों को अपने 'खिलौने' की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं।


कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर टाटा को आपराधिक तरीके से बर्बाद करने का आरोप लगाया। उन्होंने लिखा, 'टाटा को आपराधिक तरीके से बर्बाद किया जा रहा है, और कोई भी कारोबारी नेता एक शब्द भी नहीं बोल रहा। आप कब तक चुप रहेंगे? क्या तब तक, जब तक वे आप पर पूरी तरह से कब्जा न कर लें? भारतीय कारोबार मोदी और शाह के खिलौने नहीं हैं। आपमें हिम्मत की कमी है। हममें नहीं है। हम इन अपराधों के लिए न्याय दिलाकर रहेंगे।'




विवाद का सारांश


टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने एन. चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि 17 सितंबर को हुई बोर्ड बैठक में प्रक्रियात्मक अनियमितताएं थीं, जिसमें चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति को मंजूरी दी गई। उन्होंने इस प्रस्ताव की वैधता पर भी संदेह जताया है।


नोएल टाटा ने 26 अक्टूबर को टाटा संस के कंपनी सेक्रेटरी को पत्र लिखकर कहा कि प्रस्ताव तब पेश किया गया जब पहले से तय एजेंडे में चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति का उल्लेख नहीं था। उन्होंने बार-बार अनुरोध करने के बावजूद, कंपनी से बैठक की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग और कार्यवृत्त की कॉपी नहीं मिलने की बात कही।


नोएल ने कहा कि यह प्रस्ताव टाटा संस के 'आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन' के अनुसार नहीं है। उन्होंने बताया कि आर्टिकल 118 के तहत कोई चयन समिति नहीं बनाई गई थी, और न ही ऐसी किसी समिति की सिफारिश बोर्ड के सामने रखी गई थी। इसके अलावा, आर्टिकल 104B के तहत नियुक्त निदेशकों की सहमति भी नहीं ली गई थी।


उन्होंने बैठक के एजेंडे में बदलाव पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि मूल एजेंडे में चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति का कोई उल्लेख नहीं था। नोएल ने बैठक की रिकॉर्डिंग की मांग की है और कहा है कि प्रस्ताव को पारित करने से पहले उनकी आपत्तियों का समाधान नहीं किया गया।


नोएल टाटा ने कहा कि उन्हें प्रस्ताव की प्रमाणित प्रति नहीं दी गई, और उन्होंने कंपनी से कई दस्तावेज और स्पष्टीकरण मांगे हैं। उन्होंने कहा कि जब तक मीटिंग के रिकॉर्ड से स्थिति स्पष्ट नहीं हो जाती, तब तक इस प्रस्ताव पर कोई और कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए।