राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारियों के साथ की प्रेस कॉन्फ्रेंस, पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप
प्रदर्शनकारियों के साथ राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस
नई दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को रद्द करने के खिलाफ हुए प्रदर्शनों में शामिल कुछ प्रदर्शनकारियों को राहुल गांधी ने मीडिया के सामने पेश किया। उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की, जिसमें आरोप लगाया गया कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के साथ अत्यधिक बर्बरता की।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक प्रदर्शनकारी ने बताया कि पुलिस ने उसे ऐसे स्थान पर ले जाकर मारा, जहां सीसीटीवी कैमरे नहीं थे। एक महिला प्रदर्शनकारी ने भी पुलिस द्वारा उसके प्राइवेट पार्ट पर हमले का आरोप लगाया।
राहुल गांधी ने पहले भी 20 जुलाई को जंतर मंतर पर हुए प्रदर्शन में भाग लेने वाले प्रदर्शनकारियों को सामने लाया था। 14 अक्टूबर को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई के सदस्यों और अन्य कार्यकर्ताओं ने अपनी आपबीती साझा की। एक छात्रा ने पुलिस द्वारा प्राइवेट पार्ट पर लात मारने का आरोप लगाया, जबकि दिल्ली विश्वविद्यालय की अदिरा ने कहा कि पुलिस की पिटाई के कारण उसके एक कान से सुनने की क्षमता चली गई।
राहुल ने छात्रों से कहा कि वे घटनाओं के वीडियो और अन्य सबूत सुरक्षित रखें। उन्होंने कहा कि इन सबूतों के आधार पर पुलिसकर्मियों और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को चुनौती देते हुए कहा कि यह हिंदुस्तान है, यहां कोई जाति या धर्म नहीं है।
राहुल ने कहा कि जब सब कुछ खत्म होगा, तो इन सबूतों के आधार पर सभी को सजा मिलेगी, चाहे वे पुलिस वाले हों या ज्ञानेश कुमार। उन्होंने कहा कि यह देश की आवाज है और इसे दबाने की कोशिश की जा रही है।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि केरल की अदिरा के एक कान से सुनने की क्षमता चली गई है। उन्होंने पिछले प्रदर्शन में एक लड़के का उदाहरण दिया, जिसकी आंखों की रोशनी चली गई थी। एनएसयूआई से जुड़ी ऋतु बराला ने अपने साथ हुई बदसलूकी का जिक्र किया, जबकि रमित ने कहा कि वह एक कंटेंट क्रिएटर हैं और उन्हें 11 अक्टूबर को आरएसएस और भाजपा के गुंडों के बोलने के बाद हिरासत में लिया गया।
