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रियाद में हवाई हमलों ने सऊदी अरब की सुरक्षा प्रणाली को किया कमजोर

शनिवार को रियाद में हुए हवाई हमलों ने सऊदी अरब की सुरक्षा प्रणाली को गंभीर चुनौती दी। यमन के हूती विद्रोहियों ने एक सुनियोजित हमले के तहत सऊदी अरब के एयर डिफेंस सिस्टम को निष्क्रिय कर दिया। इस हमले में सऊदी अरब के अर्ली वार्निंग सिस्टम और इंटरसेप्टर मिसाइलों की विफलता ने सुरक्षा की बड़ी चूक को उजागर किया। जानें इस हमले की रणनीति और इसके प्रभाव के बारे में।
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रियाद में सुरक्षा प्रणाली की चूक

शनिवार को सऊदी अरब की राजधानी रियाद एक अप्रत्याशित युद्धक्षेत्र में तब्दील हो गई, जहां यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने एक सुनियोजित सैन्य हमले के तहत रियाद की सुरक्षा में तैनात अत्याधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम को निष्क्रिय कर दिया। इस दिन रियाद के आसमान में हवाई हमलों की तीन अलग-अलग लहरें देखी गईं। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि सऊदी अरब के अर्ली वार्निंग सिस्टम और इंटरसेप्टर मिसाइलों ने पूरी तरह से विफलता का सामना किया। तीसरी लहर के दौरान, किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के निकट सऊदी अरामको के तेल भंडारों पर हुए विस्फोटों के समय न तो कोई चेतावनी सायरन बजा और न ही कोई इंटरसेप्टर मिसाइल लॉन्च हुई।


हमले की रणनीति और प्रभाव

इस हमले ने स्पष्ट कर दिया है कि यमनी सेना ने सऊदी अरब के हवाई सुरक्षा तंत्र को कई स्तरों पर ध्वस्त कर दिया है। पहले हमले का मुख्य उद्देश्य सऊदी अरब के डिफेंस इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाना था। हूतियों ने इस बार केवल तेल डिपो या आर्थिक ठिकानों को नहीं, बल्कि सऊदी अरब के रडार, अर्ली वार्निंग सिस्टम और कमांड एंड कंट्रोल सेंटर्स को भी लक्ष्य बनाया। उन्होंने सैकड़ों कम ऊंचाई पर उड़ने वाले ड्रोन और क्रूज मिसाइलों का उपयोग करके सऊदी रडार को भ्रमित कर दिया। जब तक सऊदी सेना इस हमले को समझ पाती, तब तक उनके अर्ली वार्निंग सिस्टम के कई महत्वपूर्ण हिस्से नष्ट हो चुके थे।


सुरक्षा प्रणाली की विफलता

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में सुरक्षा की यह बड़ी चूक स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है। फुटेज में कुछ अत्यधिक तेज गति वाली मिसाइलें दिखाई दे रही हैं, जो सऊदी अरब के पैट्रियट और थार एयर डिफेंस सिस्टम द्वारा दागी गई इंटरसेप्टर मिसाइलों को चकमा देते हुए आगे बढ़ गईं। ये मिसाइलें इतनी सटीकता और गति के साथ अपने लक्ष्यों पर पहुंचीं कि पारंपरिक एंटी मिसाइल प्रणालियां उनके सामने बेअसर साबित हुईं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन यमनी मिसाइलों की गति और दिशा बदलने की क्षमता ने सऊदी अरब के आसमान में सुरक्षा कवच को कई स्तरों पर काट दिया।


सऊदी अरब की सुरक्षा स्थिति

इस हमले ने सऊदी अरब की एक और बड़ी कमजोरी को उजागर किया है, जो है इंटरसेप्टर मिसाइलों के स्टॉक की कमी। पिछले कुछ महीनों में लगातार हुए ड्रोन हमलों ने सऊदी अरब के पेट्रियट मिसाइल भंडारों को खाली होने के कगार पर पहुंचा दिया है। क्षेत्रीय अधिकारियों और खुफिया रिपोर्टों से पता चलता है कि सऊदी अरब इस समय हवाई रक्षा के मामले में बेहद असुरक्षित स्थिति में है और उसने फ्रांस, ब्रिटेन, पाकिस्तान और मिस्र जैसे मित्र देशों से तत्काल एंटी मिसाइल और हवाई रक्षा सहायता की मांग की है।