रूस और ईरान की जुगलबंदी से अमेरिका की सुरक्षा में खलल
महायुद्ध का नया मोड़
पहाड़ी क्षेत्र में चल रहा संघर्ष अब पूरी तरह से नियंत्रण से बाहर हो चुका है, और इस कठिन समय में रूस ने स्थिति को पलटने का प्रयास किया है। अमेरिकी सेना की हवाई सुरक्षा प्रणाली अन्य स्थानों पर तैनात थी, जिसके कारण अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के सुरक्षित ठिकानों पर सटीक हमले हुए। वाशिंगटन में हलचल के बीच, रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि रूस की गुप्त सहायता के बिना ईरान के लिए इन संवेदनशील अमेरिकी ठिकानों का पता लगाना और उन्हें नष्ट करना संभव नहीं था। अब वाशिंगटन इस बात की जांच कर रहा है कि क्या पुतिन ने चुपचाप मोजतबा को सहायता प्रदान की, जिससे ईरान को सीआईए के ठिकानों की जानकारी मिली।
ईरान का जवाबी हमला
डोनाल्ड ट्रंप की सेना भले ही ईरान पर हवाई हमले कर रही हो, लेकिन मोजतबा खामनेई की सेना ने जॉर्डन में अमेरिकी हितों के खिलाफ एक बड़े सैन्य अभियान की घोषणा की है, जिसे ऑपरेशन अलबर्ग नाम दिया गया है। इस हमले ने अमेरिकी सेना की कमजोरियों को उजागर कर दिया है। ईरान का दावा है कि इस हमले में अमेरिका के आठ MQ9 जासूसी ड्रोन नष्ट हो गए हैं, जबकि अन्य ड्रोन और हेलीकॉप्टरों को भी गंभीर नुकसान पहुंचा है।
रूस की भूमिका पर सवाल
रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी खुफिया एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या रूस ने ईरान को कोई गुप्त सेटेलाइट डेटा प्रदान किया था। हाल के दिनों में खाड़ी क्षेत्र में ईरान के ड्रोन ने जिस सटीकता से सीआईए के ठिकानों को नष्ट किया है, उसने अमेरिका को हिला कर रख दिया है। ईरान के ड्रोन ने रियाद में अमेरिकी दूतावास के गुप्त सीआईए स्टेशन को भी निशाना बनाया।
अमेरिका की प्रतिक्रिया
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि जब भी ईरान किसी जहाज पर हमला करेगा, तो अमेरिकी सेना ईरान के भीतर बिजली घरों या पुलों को निशाना बनाएगी। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास सराची ने कहा है कि उनकी रक्षा नीति स्पष्ट है, और वे हर आंख के बदले एक आंख लेंगे। रूस और ईरान की बढ़ती सहयोगिता के बीच अमेरिका के लिए संकट गहरा हो गया है।
ईरान की मिसाइल रणनीति
ईरान अब मध्य पूर्व में अमेरिकी ठिकानों पर लगातार मिसाइल हमले कर रहा है, जिससे अमेरिका को गंभीर चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका इस भ्रम में था कि ईरान की मिसाइलें आसानी से इंटरसेप्ट की जा सकती हैं, लेकिन अब स्थिति यह है कि अमेरिका पिछले पांच महीनों से मध्य पूर्व में फंसा हुआ है।
