रूस के खिलाफ यूरोप के नए प्रतिबंध और भारत पर प्रभाव
रूस और यूरोप के बीच बढ़ते तनाव
रूस से आई हालिया खबरें भारत के लिए उत्साहजनक हैं, खासकर जब यूरोप ने कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। यूरोप ने उन कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की है जो सीधे रूस की सेना के साथ काम कर रही हैं। इस बीच, रूस ने भारत के साथ अपने तेल आपूर्ति संबंधों को मजबूत करने के लिए डिस्काउंट की पेशकश शुरू कर दी है। यूरोपीय संघ ने रूस पर 21वें प्रतिबंध पैकेज की घोषणा की है, जिसका असर भारत, चीन और अन्य देशों की 50 कंपनियों पर पड़ेगा।
ईयू के नए निर्यात नियंत्रण उपाय
यूरोपीय संघ ने उन कंपनियों पर निर्यात नियंत्रण लागू करने का निर्णय लिया है जो रूस की सेना के साथ सीधे कारोबार करती हैं। इस निर्णय का प्रभाव भारत, चीन, किरगिस्तान, कजाकिस्तान और संयुक्त अरब अमीरात की कंपनियों पर पड़ेगा। ईयू का यह कदम रूस की युद्ध अर्थव्यवस्था पर दबाव डालने के लिए उठाया गया है, लेकिन इससे अन्य देशों पर भी असर होगा।
बैंकों और क्रिप्टो प्लेटफार्मों पर नए प्रतिबंध
ब्रुसेल्स ने रूस पर प्रतिबंधों की एक नई सूची तैयार की है, जिसमें बैंकों, हथियार निर्माताओं और क्रिप्टो ऑपरेटरों को टारगेट किया गया है। लगभग 90 बैंकों की संपत्तियों को जब्त किया जा सकता है, और 11 क्रिप्टो करेंसी प्लेटफार्मों पर लेनदेन पर प्रतिबंध लगाने की योजना है। यूरोपीय संघ रूस के ऊर्जा निर्यात से होने वाले राजस्व को कम करने के लिए भी कदम उठा रहा है।
रूस की कच्चे तेल की रणनीति
रूस ने अपनी कच्चे तेल की बिक्री में वृद्धि की है, खासकर भारत और चीन जैसे बड़े खरीदारों के लिए। मार्च से, रूस ने अपने तेल की कीमतों में वृद्धि की है, लेकिन अब वह बंपर डिस्काउंट दे रहा है। यह कदम वैश्विक तेल आपूर्ति में आई रुकावटों के बीच उठाया गया है, जिससे रूस को अपने उत्पादों की बिक्री में मदद मिल रही है।
