रूस में युद्धकालीन संसदीय चुनाव: पुतिन की नीतियों का समर्थन
रूस में चुनावी प्रक्रिया का समापन
रूस में पहली बार युद्धकालीन संसदीय चुनाव प्रक्रिया रविवार को समाप्त होने जा रही है। इस चुनाव में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की नीतियों का कोई खास विरोध नहीं दिखाई दे रहा है, जिससे क्रेमलिन के प्रभाव में और वृद्धि की संभावना है। चुनाव के अंतिम दिन, यूक्रेनी बलों ने रातभर रूस पर 1,000 से अधिक ड्रोन हमले किए, जिनमें से सैकड़ों ड्रोन मॉस्को की दिशा में भेजे गए।
मतदान प्रक्रिया और भागीदारी
मतदान की शुरुआत शुक्रवार को हुई थी, और 11.1 करोड़ योग्य मतदाताओं की भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए अधिकारियों ने ऑनलाइन मतदान को प्रोत्साहित किया। इस बार चुनाव में यूक्रेन के चार क्षेत्रों के निवासियों को भी शामिल किया गया है, जिन्हें युद्ध के दौरान रूस ने अवैध रूप से अपने में मिला लिया था, हालांकि इन क्षेत्रों पर अभी भी उसका पूरा नियंत्रण नहीं है। 2014 में रूस द्वारा अवैध रूप से कब्जा किए गए क्रीमिया में भी मतदान हो रहा है।
मतदान की वैधता पर विवाद
कीव के अधिकारियों ने रूस के कब्जे वाले क्षेत्रों में हो रहे मतदान को अवैध करार दिया है और विदेशी सरकारों से इसके परिणामों को मान्यता नहीं देने की अपील की है। यूरोपीय संघ ने इस कदम को 'अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन' बताया है। क्रेमलिन चाहता है कि 2022 में यूक्रेन पर हमले के बाद पहली बार हो रहे संसदीय चुनाव में युद्ध के लिए जनता का समर्थन दिखे और उसकी कार्रवाई को वैधता मिले।
चुनाव में असहमति पर अंकुश
क्रेमलिन ने असहमति को दबाने की कोशिश की है ताकि राजनीतिक जोखिमों से बचा जा सके। सरकारी मीडिया के व्यापक प्रचार और वास्तविक विपक्ष की अनुपस्थिति के कारण यह संभावना है कि बढ़ती आर्थिक चुनौतियों और देश के भीतर यूक्रेनी ड्रोन हमलों के बीच क्रेमलिन रूसी राजनीति पर अपना कड़ा नियंत्रण बनाए रखेगा। मतदाताओं ने दो अलग-अलग मतपत्र डाले।
चुनाव के प्रारंभिक परिणाम
इन मतपत्रों में से एक के माध्यम से 450-सदस्यीय ड्यूमा की आधी सीटों के लिए मतदाता राजनीतिक दलों में से चयन कर रहे हैं। शेष सीटों पर एकल-सीट निर्वाचन क्षेत्रों में व्यक्तिगत उम्मीदवारों के बीच मुकाबला हो रहा है। देश के पश्चिमी हिस्से में मतदान समाप्त होने के कुछ घंटों के भीतर प्रारंभिक परिणामों की उम्मीद है।
क्रेमलिन की पार्टी का बहुमत
क्रेमलिन की प्रमुख पार्टी 'यूनाइटेड रशिया' के स्टेट ड्यूमा में अपना भारी बहुमत बनाए रखने की उम्मीद है। 'व्यवस्थित विपक्ष' कहलाने वाली कई छोटी पार्टियों के भी अपनी उपस्थिति बनाए रखने की संभावना है, जो सभी प्रमुख मुद्दों पर पुतिन के विचारों के अनुरूप मतदान करती हैं।
याब्लोको पार्टी की स्थिति
उदारवादी याब्लोको पार्टी एकमात्र पंजीकृत राजनीतिक संगठन थी जिसने सार्वजनिक रूप से युद्ध की आलोचना की थी। रूस के उच्चतम न्यायालय ने पिछले महीने इसे चुनाव से बाहर कर दिया, और अब इसके केवल कुछ दर्जन उम्मीदवार ही एकल-सीट निर्वाचन क्षेत्रों में मैदान में हैं। इसके अलावा, कुछ युद्ध-विरोधी नेताओं को चुनाव अभियान से पहले जेल भेज दिया गया या उन्हें विदेश भागने के लिए मजबूर होना पड़ा।
चुनाव पर्यवेक्षकों की अनुपस्थिति
सरकारी नीति की कुछ आलोचना करने वाले, लेकिन पुतिन की आलोचना से बचने वाले याब्लोको और कम्युनिस्ट पार्टी ने कहा कि उनके कई पर्यवेक्षकों को मतदान केंद्रों में प्रवेश नहीं करने दिया गया। रूस ने यूरोप में सुरक्षा और सहयोग संगठन (ओएससीई) के पर्यवेक्षकों को आमंत्रित नहीं किया। रूसी विदेश मंत्रालय ने संगठन पर रूस की आलोचना को लेकर 'दोहरा मापदंड' अपनाने का आरोप लगाया।
ओएससीई की प्रतिक्रिया
ओएससीई संसदीय सभा के अध्यक्ष पेरे जोआन पोंस ने कहा कि यह निर्णय संगठन के सदस्य के रूप में रूस की प्रतिबद्धताओं का उल्लंघन है।
