लखनऊ के KGMU में कैंसर दवाओं का 2 करोड़ का घोटाला, प्रशासन में हड़कंप
घोटाले का खुलासा
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज (KGMU) में गरीबों के नाम पर दी जाने वाली कैंसर दवाओं के बाजार में बिक्री के मामले में 2 करोड़ रुपये से अधिक का घोटाला सामने आया है। इस घटना के बाद KGMU प्रशासन में हड़कंप मच गया है। इस मामले में तीन संविदा कर्मियों को बर्खास्त कर दिया गया है और जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
घोटाले की पृष्ठभूमि
इस संस्थान के भीतर चल रहे इस गोरखधंधे में कई अन्य विभागीय कर्मचारियों की संलिप्तता भी सामने आ रही है। ये लोग मृत मरीजों के नाम पर दवाएं जारी कर उन्हें बाजार में बेच रहे थे। मृत और फर्जी मरीजों के नाम पर लगभग 2 से 2.5 करोड़ रुपये की महंगी दवाएं और इंजेक्शन बेचे जाने की आशंका है।
जांच की प्रक्रिया
कैसे हुआ शक?
KGMU के यूरोलॉजी विभाग का कैंसर दवाओं का मासिक बजट अक्टूबर-नवंबर 2025 में लगभग 10 लाख रुपये था, जो मार्च 2026 में बढ़कर 45 लाख रुपये के पार पहुंच गया। इसके बाद अधिकारियों ने आंतरिक जांच का आदेश दिया। जांच में पता चला कि जो प्रोटीन इंजेक्शन हर छह महीने में एक बार दिए जाने चाहिए थे, उन्हें एक ही महीने में कई बार कागजों पर दर्ज किया गया। इसके अलावा, असाध्य योजना के तहत महंगी दवाएं उन मरीजों के नाम पर निकाली गईं, जिनकी मृत्यु हो चुकी थी। जांच समिति के अध्यक्ष डॉक्टर के के सिंह के अनुसार, इस मामले में तीन संविदाकर्मी, एक चीफ फार्मासिस्ट और विभागाध्यक्ष शामिल थे।
प्रशासन की कार्रवाई
केजीएमयू प्रशासन की प्रतिक्रिया
घोटाले की जानकारी के बाद KGMU प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई की और तीन संविदाकर्मियों को बर्खास्त कर दिया। संविदाकर्मियों की उपलब्धता देने वाली एजेंसी से वसूली की जाएगी। एक चीफ फार्मासिस्ट अरशद वसी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है और उनके निलंबन की प्रक्रिया शुरू की गई है। अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर यूरोलॉजी विभाग के प्रमुख को भी हटा दिया गया है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
मनीष सिसौदिया का बयान
दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसौदिया ने इस घोटाले को लेकर मोदी सरकार पर तीखा हमला किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि मोदी है तो यह संभव है, मृत मरीजों के नाम पर बीजेपी का दवा घोटाला। उन्होंने यह भी कहा कि ये लोग मुर्दों को भी नहीं छोड़ते।
