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लखनऊ में चुनावी पोस्टर विवाद: समाजवादी पार्टी पर निशाना

उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 सीटों के लिए मतदान के दौरान लखनऊ में एक विवादास्पद पोस्टर सामने आया है। इस पोस्टर में समाजवादी पार्टी के नेताओं को माफियाओं का भाई बताया गया है। पिछले कुछ दिनों में लखनऊ में कई ऐसे पोस्टर लगाए गए हैं, जिससे राजनीतिक तनाव बढ़ गया है। इस लेख में जानें कि कैसे ये पोस्टर चुनावी माहौल को प्रभावित कर रहे हैं और क्या है इसके पीछे का सच।
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लखनऊ में मतदान और विवादित पोस्टर

लखनऊ में चुनावी माहौल: उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 सीटों के लिए मतदान आज सुबह 8 बजे से शुरू हो गया है। इस दौरान, राजधानी लखनऊ में एक विवादास्पद पोस्टर सामने आया है, जिसमें माफियाओं को समाजवादी पार्टी के नेताओं का भाई बताया गया है। हाल के दिनों में लखनऊ में विपक्षी नेताओं के खिलाफ कई पोस्टर लगाए गए हैं, जिससे राजनीतिक तनाव बढ़ गया है।

नेशनल पीजी कॉलेज चौराहे पर समाजवादी पार्टी और उसके प्रमुख अखिलेश यादव को निशाना बनाया गया है। इस पोस्टर में अखिलेश को मुस्लिम टोपी (कुफ़ी) पहने हुए दिखाया गया है। इसमें दिवंगत माफिया अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी की तस्वीरें भी शामिल हैं, साथ ही पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान का नाम भी लिया गया है। पोस्टर में एक समाचार लेख का स्क्रीनशॉट भी है, जिसका शीर्षक है- 'अतीक अहमद को सपा में वापसी के बाद इनाम में मिली थी पंडित नेहरू की सीट, जानिये राजू पाल से कैसे शुरू हुई दुश्मनी।'

पिछले एक सप्ताह में अखिलेश यादव और अन्य विपक्षी नेताओं के खिलाफ लखनऊ में कई पोस्टर लगाए गए हैं। विजयदशमी के अवसर पर 1090 चौराहे पर योगी सेना (भारत) के मोहित मिश्रा द्वारा एक पोस्टर लगाया गया है, जिसमें लिखा है- 'भारत के विरोधी रावण'। इस पोस्टर में सीजेपी नेता अभिजीत दीपिके, आशुतोष राणा, सौरभ दास, इमरान खान, नेहा बोरा, प्रशांत भूषण, आशुतोष रांका और अंजिक्य शिंदे के चेहरे भी शामिल हैं।

इससे पहले, शहर में 'भारत विरोधी दशानन रावण' के नाम से पोस्टर लगाए गए थे, जिनमें पूर्व सांसद अतीक अहमद, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और अमेरिकी कारोबारी एलन मस्क के चेहरे दिखाए गए थे। इन पोस्टरों के माध्यम से सनातन रक्षा संगठन ने इन व्यक्तियों पर भारत विरोधी गतिविधियों और देश को अस्थिर करने के प्रयासों का आरोप लगाया था।