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लद्दाख में लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण के लिए नई पहल

लद्दाख में लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण को सशक्त बनाने के लिए प्रशासन ने सभी सात जिलों में स्वायत्त हिल डेवलपमेंट काउंसिल का गठन करने की घोषणा की है। इसके साथ ही, एक विशेष UT-स्तरीय निकाय बनाने की योजना भी है, जो अनुच्छेद 371 के समान अधिकारों के साथ कार्य करेगा। यह कदम क्षेत्रीय विकास और प्रशासनिक प्रतिनिधित्व को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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लद्दाख में स्वायत्त हिल डेवलपमेंट काउंसिल का गठन


केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण को सशक्त बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। लद्दाख प्रशासन ने यह घोषणा की है कि सभी सात जिलों में एक-एक स्वायत्त हिल डेवलपमेंट काउंसिल (Autonomous Hill Development Council) का गठन किया जाएगा। इसके साथ ही, पूरे केंद्र शासित प्रदेश के लिए एक अलग शीर्ष निकाय (UT-Level Body) बनाने की योजना भी है, जिसे अनुच्छेद 371 के समान विशेष अधिकार दिए जाने का प्रस्ताव है। यह निर्णय क्षेत्रीय प्रशासन और विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


सात जिलों को मिलेगा प्रतिनिधित्व

लद्दाख के मुख्य सचिव आशीष कुंद्रा ने बताया कि यह निर्णय जमीनी स्तर पर लोकतांत्रिक शासन और संतुलित विकास को बढ़ावा देने के लिए लिया गया है। पहले लद्दाख में केवल लेह और कारगिल जिले थे, लेकिन अप्रैल 2026 में पांच नए जिले- शाम, नुब्रा, चांगथांग, ज़ांस्कर और द्रास- बनाए गए। अब तक केवल लेह और कारगिल में ही निर्वाचित हिल काउंसिल थीं, जबकि नए जिलों में ऐसी व्यवस्था नहीं थी। नए निर्णय के बाद सभी सात जिलों को समान प्रशासनिक प्रतिनिधित्व प्राप्त होगा।


अनुच्छेद 371 जैसी विशेष व्यवस्था का प्रस्ताव

मुख्य सचिव के अनुसार, प्रस्तावित UT-स्तरीय निकाय सभी हिल काउंसिल के ऊपर कार्य करेगा और इसे विधायी, कार्यकारी, वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार दिए जाने की योजना है। यह व्यवस्था संविधान के अनुच्छेद 371 के समान तैयार की जा रही है, लेकिन इसे लद्दाख की विशेष परिस्थितियों के अनुसार अनुकूलित किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह का मॉडल देश में पहली बार देखने को मिलेगा, जिसमें विभिन्न राज्यों की सफल व्यवस्थाओं की विशेषताएँ शामिल की जाएंगी।


अनुच्छेद 371 का महत्व

अनुच्छेद 371 भारतीय संविधान का वह प्रावधान है, जिसके तहत कुछ राज्यों और क्षेत्रों को उनकी सांस्कृतिक पहचान, भूमि अधिकार, स्थानीय रोजगार और प्रशासनिक व्यवस्था की सुरक्षा के लिए विशेष संवैधानिक संरक्षण दिया जाता है। लद्दाख में भी लंबे समय से इसी तरह की संवैधानिक सुरक्षा की मांग उठती रही है। जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और लेह एपेक्स बॉडी (LAB) तथा कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) लगातार इस मुद्दे को उठाते रहे हैं।


सोनम वांगचुक की मांग को मिल सकती है दिशा

यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब अनुच्छेद 370 हटाए जाने और जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन के सात वर्ष पूरे होने वाले हैं। पिछले वर्ष राज्य का दर्जा बहाल करने और संवैधानिक सुरक्षा की मांग को लेकर आंदोलन करने वाले सोनम वांगचुक ने मई में उम्मीद जताई थी कि लद्दाख को अनुच्छेद 371 जैसी सुरक्षा मिल सकती है। केंद्र सरकार और LAB-KDA के प्रतिनिधियों के बीच हुई बातचीत के बाद "सैद्धांतिक सहमति" बनने की बात भी सामने आई थी। अब सात हिल काउंसिल और विशेष UT-स्तरीय निकाय का प्रस्ताव उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।