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लोकसभा का मानसून सत्र समाप्त, कार्य उत्पादकता 19 प्रतिशत रही

लोकसभा का मानसून सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया है, जिसमें कार्य उत्पादकता केवल 19 प्रतिशत रही। इस दौरान विपक्षी दलों के हंगामे के कारण सदन में प्रश्नकाल और शून्यकाल का संचालन नहीं हो सका। अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी और छात्रों पर पुलिस कार्रवाई जैसे मुद्दों पर चर्चा की मांग की गई, लेकिन कोई सहमति नहीं बन पाई। जानें इस सत्र में क्या-क्या हुआ और किन विधेयकों को मंजूरी मिली।
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लोकसभा की कार्यवाही स्थगित


बृहस्पतिवार को लोकसभा की कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। इस मानसून सत्र में निचले सदन की कार्य उत्पादकता केवल 19 प्रतिशत रही, और इस दौरान एक भी दिन प्रश्नकाल या शून्यकाल का संचालन नहीं हो सका।


अयोध्या के राम मंदिर में कथित चढ़ावे की चोरी और दिल्ली में छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग को लेकर विपक्षी दलों के सदस्यों ने लगातार हंगामा किया, जिससे सदन में गतिरोध बना रहा।


मानसून सत्र के दौरान केवल 28 और 29 जुलाई को सदन में सामान्य माहौल देखने को मिला, जब लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 पर लगभग दस घंटे तक चर्चा हुई।


सदन की कार्यवाही के अंतिम दिन, लोकसभा अध्यक्ष ने सदस्यों से राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के सम्मान में खड़े होने का अनुरोध किया। आमतौर पर सत्र समाप्ति पर अध्यक्ष अपने संबोधन में कार्य उत्पादकता और पारित विधेयकों का उल्लेख करते हैं।


वंदे मातरम् के गायन के बाद, सदन की बैठक को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की घोषणा की गई।


इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, और अन्य प्रमुख नेता सदन में उपस्थित थे।


संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने संवाददाता सम्मेलन में बताया कि इस सत्र में लोकसभा की कार्य उत्पादकता 19 प्रतिशत रही। संसद का यह मानसून सत्र 20 जुलाई को शुरू हुआ था।


सरकार ने छात्रों के मुद्दे पर चर्चा करने और गृह मंत्री अमित शाह के जवाब के लिए तैयार रहने की बात कही, लेकिन विपक्ष ने राम मंदिर से संबंधित मुद्दों पर चर्चा की मांग की।


लोकसभा अध्यक्ष ने विपक्षी सदस्यों से बार-बार प्रश्नकाल चलाने और विधेयकों पर चर्चा में भाग लेने की अपील की, लेकिन विपक्ष अपनी मांगों पर अड़ा रहा।


सदन ने नीट प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ छात्रों के प्रदर्शन के संदर्भ में 29 जुलाई को लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 को मंजूरी दी।


इस विधेयक पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की टिप्पणियों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई।


विधेयक पर चर्चा में कई प्रमुख नेता शामिल हुए, जिनमें प्रियंका गांधी वाद्रा, तेजस्वी सूर्या, और अखिलेश यादव शामिल थे।


प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने विधेयक पर चर्चा का जवाब दिया।


सदन ने राष्ट्रगान 'जन गण मन' के साथ राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम्' के गायन को अनिवार्य बनाने वाले विधेयक को भी मंजूरी दी।


सदन में अन्य कई विधेयक भी विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच बिना चर्चा के पारित किए गए।


इनमें 'उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीश संख्या) संशोधन विधेयक, 2026', 'विनियोग (संख्यांक 3) विधेयक, 2026', और 'कराधान एवं अन्य विधियां संशोधन विधेयक, 2026' शामिल हैं।


सदन ने कई विपक्षी दलों की आलोचना के बाद विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को संसद की संयुक्त समिति को भेजा।