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वन्दे मातरम् विवाद: कपिल सिब्बल और मायावती की प्रतिक्रियाएँ

वन्दे मातरम् के गायन को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है। कपिल सिब्बल ने बीजेपी पर आरोप लगाया है कि उसने 1950 से सभी छंद नहीं गाए हैं। मायावती ने भी इस मुद्दे पर अपनी राय दी है, जिसमें उन्होंने जनहित के मुद्दों पर ध्यान देने की सलाह दी है। जानें इस राजनीतिक बहस के सभी पहलुओं के बारे में।
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वन्दे मातरम् पर राजनीतिक बहस


वन्दे मातरम् विवाद: देश में राष्ट्रीय गीत 'वन्दे मातरम्' के सभी 6 छंदों के गायन को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच तीखी बहस चल रही है। केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस वर्किंग कमेटी के उस निर्णय को देशविरोधी करार दिया है, जिसमें पार्टी ने अपने कार्यक्रमों में वन्दे मातरम् के केवल पहले दो छंद गाने का निर्णय लिया है। इस पर राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने बीजेपी पर कड़ा प्रहार किया है।


कपिल सिब्बल ने सवाल उठाया कि क्या बीजेपी ने 1950 से अब तक किसी भी निजी या सरकारी कार्यक्रम में वन्दे मातरम् के सभी छंद गाए हैं? उन्होंने यह भी पूछा कि क्या नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री रहते या पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने ऐसा किया? सिब्बल ने अपने एक्स पोस्ट में लिखा, 'अमित शाह का बयान: वन्दे मातरम् के केवल दो छंद गाने के CWC के निर्णय को 'राष्ट्र-विरोधी' कहा गया है... क्या बीजेपी ने 1950 से किसी भी कार्यक्रम में सभी छंद गाए हैं? क्या तब आप राष्ट्र-विरोधी थे? यह आपकी वोट-बैंक की राजनीति का पर्दाफाश है!'



मायावती की सलाह


यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने भी इस मुद्दे पर अपनी राय व्यक्त की। उन्होंने कहा कि वन्दे मातरम् के गायन को लेकर जो राजनीतिक विवाद चल रहा है, वह उचित नहीं है। मायावती ने कहा कि हाल ही में संसद में जो कानून पारित हुआ है, वह कोई नई बात नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि सभी राजनीतिक पार्टियाँ अपने स्वार्थ के लिए कानूनों में बदलाव करती रहती हैं।



बसपा सुप्रीमो ने आगे कहा कि इस समय देश में बेरोजगारी, बाढ़ और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना आवश्यक है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से आग्रह किया कि वे जनहित के मुद्दों पर ध्यान दें।