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वाराणसी में जलभराव पर अखिलेश यादव का तंज, पीएम मोदी के स्मार्ट सिटी दावे पर सवाल

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में लगातार बारिश के कारण जलभराव की समस्या उत्पन्न हो गई है। इस पर समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने कटाक्ष करते हुए पीएम मोदी के स्मार्ट सिटी के दावों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने शहर की खराब सड़कों और जलभराव की स्थिति को लेकर तंज कसा है। जानें इस मुद्दे पर उनकी पूरी प्रतिक्रिया और वाराणसी की वर्तमान स्थिति के बारे में।
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वाराणसी में जलभराव की समस्या

वाराणसी जलभराव: उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में हो रही लगातार बारिश ने लोगों के लिए समस्याएं खड़ी कर दी हैं। कुछ क्षेत्रों में बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है, जबकि अन्य स्थानों पर भारी जलभराव के कारण सड़कें तालाब में तब्दील हो गई हैं। इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी में जलभराव को लेकर नगर निगम की आलोचना की जा रही है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने शहर के कई हिस्सों में खराब सड़कों और जलभराव पर कटाक्ष किया है।


पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने रविवार को एक पोस्ट में लिखा, 'काशी के क्योटो में हुआ चमत्कार... पानी पर चल गई दो पहिया नाव... जनता पूछ रही है कि पचासों हजार के बजट से काशी को स्मार्ट सिटी बनाने का जो दावा था, उस पर किसने ये पानी फेर दिया? क्या दिल्लीवालों का काम लखनऊवालों ने चौपट कर दिया? न गंगा साफ हुई, न वरुणा और न ही काशी के नाले, तभी तो नल को छोड़कर हर तरफ जल ही जल है।'



उन्होंने आगे कहा, 'अगर दूरबीन और ड्रोन काम नहीं कर रहे हैं तो रडार से ही दिखवा लें, वैसे भी अब बादल नहीं हैं। अगर फिर भी न दिखाई दे तो यूपी के बुलडोज़र पर चढ़कर देख लें, कम से कम कभी तो बुलडोज़र का सकारात्मक इस्तेमाल हो।' सपा प्रमुख की यह टिप्पणी एक वीडियो के साथ आई है, जिसमें एक स्कूटी सवार युवती सड़कों की खराब स्थिति और जलभराव पर कटाक्ष करती है। जलभराव की ओर इशारा करते हुए युवती का कहना है कि यह प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के कैंट विधानसभा 390 की स्थिति है।


वह मजाक करते हुए कहती है, 'मोदी जी का क्योटो देखने लायक है, क्योटो का आनंद लेने जा रही हूं। 10 मिनट की बारिश के बाद यह हालत हो जाती है, मोदी जी के संसदीय क्षेत्र बनारस की।' उल्लेखनीय है कि पीएम नरेंद्र मोदी ने काशी (वाराणसी) को जापान के क्योटो शहर की तर्ज पर विकसित करने की घोषणा 30 अगस्त 2014 को की थी, जिसके संदर्भ में अखिलेश यादव ने यह कटाक्ष किया है।