विपक्षी दलों ने चुनावी प्रक्रिया पर न्यायिक समीक्षा की मांग की
विपक्षी दलों का एकजुटता
नई दिल्ली। तमिलनाडु में कांग्रेस और डीएमके के बीच संबंध समाप्त हो चुके हैं, और आम आदमी पार्टी ने भी कांग्रेस से अपने संबंध तोड़ लिए हैं। फिर भी, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के मुद्दे पर सभी राजनीतिक दल एकजुट हो गए हैं। सभी ने मिलकर देश के मुख्य न्यायाधीश को एक पत्र लिखा है। मंगलवार को 23 विपक्षी दलों और एक निर्दलीय सांसद ने एसआईआर और चुनाव प्रक्रिया से संबंधित मुद्दों पर यह पत्र भेजा।
यह ध्यान देने योग्य है कि दो साल बाद, 8 जून को विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ ब्लॉक की बैठक हुई थी, जिसमें चार प्रस्ताव पारित किए गए थे। इनमें से एक प्रस्ताव एसआईआर के मुद्दे पर मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखने का था। उल्लेखनीय है कि उस बैठक में डीएमके और आम आदमी पार्टी के नेता उपस्थित नहीं थे, लेकिन पत्र पर उनके नेताओं ने भी हस्ताक्षर किए हैं।
पत्र में कहा गया है कि जब लोकतांत्रिक संस्थाएं सही तरीके से कार्य नहीं करतीं, तब जनता न्यायपालिका की ओर आशा भरी नजरों से देखती है। पत्र में चुनाव आयोग की भूमिका और एसआईआर प्रक्रिया के विभिन्न राज्यों में लोगों पर प्रभाव का उल्लेख किया गया है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर बताया कि 8 जून को ‘इंडिया’ ब्लॉक की बैठक में पत्र भेजने का निर्णय लिया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि उस बैठक में 21 पार्टियों और एक निर्दलीय सांसद ने भाग लिया था, लेकिन पत्र पर 23 पार्टियों और एक निर्दलीय सांसद ने हस्ताक्षर किए हैं।
कांग्रेस की ओर से पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने हस्ताक्षर किए हैं। इसके अलावा, तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी, राजद नेता तेजस्वी यादव, सपा प्रमुख अखिलेश यादव, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला आदि ने भी हस्ताक्षर किए हैं। तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने बताया कि इस पत्र पर डीएमके और आम आदमी पार्टी ने भी हस्ताक्षर किए हैं। निर्दलीय सांसद कपिल सिब्बल ने भी इस पर हस्ताक्षर किया है।
तृणमूल कांग्रेस की सांसद सागरिका घोष ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की एसआईआर प्रक्रिया का उपयोग बीजेपी को लाभ पहुंचाने और चुनाव परिणामों को प्रभावित करने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसी कारण विपक्षी दलों ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर चुनावी प्रक्रिया की न्यायिक समीक्षा की मांग की है।
