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वैष्णो देवी मंदिर में नकली चांदी चढ़ावे का विवाद: अदालत ने जांच के आदेश दिए

जम्मू-कश्मीर की एक अदालत ने माता वैष्णो देवी मंदिर में चढ़ाए गए नकली चांदी के चढ़ावे की जांच के आदेश दिए हैं। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने आरोप लगाया है कि 20 टन चांदी में से 95 प्रतिशत नकली है, जिसकी कीमत लगभग 550 करोड़ रुपये है। इस मामले में भक्तों की आस्था का नाजायज़ फ़ायदा उठाने का आरोप लगाया गया है। जानें इस विवाद की पूरी कहानी और अदालत के आदेश के पीछे की वजह।
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नकली चांदी चढ़ावे की जांच का आदेश

नई दिल्ली। अयोध्या राम मंदिर और बद्रीनाथ में दान चोरी के विवाद के बीच, जम्मू-कश्मीर की अदालत ने माता वैष्णो देवी मंदिर में चढ़ाए गए 550 करोड़ रुपये से अधिक के “नकली चांदी” के चढ़ावे से संबंधित रिकॉर्ड पेश करने का आदेश दिया है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया पर लिखा कि श्री माता वैष्णो देवी मंदिर में चढ़ाए गए 20 टन चांदी के चढ़ावे में से 95 प्रतिशत, जिसकी कीमत लगभग 550 करोड़ रुपये बताई जा रही है, नकली पाया गया है।



पवन खेड़ा ने कहा कि यह असंभव है कि कोई भक्त श्रद्धा से माता के दर्शन के लिए जाए और वहां नकली चांदी का चढ़ावा चढ़ाए। यह हिंदुओं की आस्था का अपमान है। उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर में चांदी के चढ़ावे की अदला-बदली और हेराफेरी हुई है। उनके अनुसार, राम मंदिर से लेकर बद्रीनाथ और अब वैष्णो देवी तक की कहानी एक जैसी है।


उन्होंने आरोप लगाया कि भक्तों की आस्था का नाजायज़ फ़ायदा उठाया गया है। उनके द्वारा दिए गए दान और चढ़ावे को लूट लिया गया है, लेकिन प्रधानमंत्री इस गंभीर मुद्दे पर चुप हैं। उन्होंने कहा कि जिस धर्म का हवाला देकर वे सत्ता में हैं, यदि वे उसकी आस्था और प्रतिष्ठा की चिंता नहीं कर सकते, तो उन्हें इस पद पर रहने का कोई अधिकार नहीं है।


अदालत ने यह आदेश उस याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया जिसमें माता वैष्णो देवी मंदिर में भक्तों द्वारा चढ़ाई गई चांदी के कथित गबन, हेराफेरी, चोरी और मिलावट के मामले में FIR दर्ज करने की मांग की गई थी।


मंदिर बोर्ड ने मई में लगभग 20 टन चांदी का चढ़ावा, जिसकी कीमत 550 करोड़ रुपये आंकी गई थी, सरकारी टकसाल में भेजा था। इस प्रक्रिया के दौरान, यह पता चला कि मंदिर बोर्ड द्वारा भेजी गई चांदी नकली थी और केवल 5 प्रतिशत असली चांदी निकली।


धातु की जांच से यह स्पष्ट हुआ कि लगभग 95% चांदी वास्तव में कैडमियम और लोहा था। प्रारंभ में यह माना गया कि भक्तों ने अनजाने में नकली चांदी चढ़ाई थी। हालांकि, वकील दीपक शर्मा ने क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर जनरल को दी गई अपनी शिकायत में चांदी के चढ़ावे की हेराफेरी और गबन का आरोप लगाया।


9 मई को दर्ज कराई गई शिकायत में शर्मा ने “आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, गबन और आधिकारिक रिकॉर्ड में हेरफेर” का आरोप लगाया और FIR दर्ज करने के साथ-साथ सभी रिकॉर्ड और सबूतों को सुरक्षित रखने की मांग की। शिकायतकर्ता ने कहा कि वह यह जानना चाहता है कि क्या भक्तों द्वारा चढ़ाए गए असली चढ़ावे को बदल दिया गया और चुरा लिया गया, या क्या भक्तों ने अनजाने में नकली चांदी खरीदी और उसे मंदिर में चढ़ाया।


कटरा में त्रिकूट पहाड़ियों पर स्थित गुफा मंदिर में 90 लाख से अधिक भक्त दर्शन के लिए आते हैं। वकील ने कहा, “कोई भी भक्त मंदिर में कभी नकली चांदी नहीं चढ़ाएगा। इस बड़े घोटाले का पर्दाफाश करने के लिए गहन जांच की ज़रूरत है।”


उन्होंने कहा कि मंदिर में चढ़ाई गई चांदी की अनुमानित कीमत लगभग 550 करोड़ रुपये थी, लेकिन जब उस धातु में सस्ती धातुओं और कैडमियम की मिलावट पाई गई, तो उसकी कीमत घटकर केवल 30 करोड़ रुपये रह गई।