शिवराज सिंह चौहान और मोहन यादव के बीच बढ़ता विवाद
राजनीतिक संघर्ष की नई परतें
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की पार्टी में हालात बिगड़ते जा रहे हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव के साथ उनका विवाद अब खुलकर सामने आ चुका है। दोनों नेता एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। यह विवाद काफी समय से चल रहा था, लेकिन हाल ही में जब नए संगठन महामंत्री चंद्रशेखर भोपाल पहुंचे और पार्टी नेताओं के साथ बैठक की, तब यह मामला मीडिया में आया। शिवराज ने बैठक में कहा कि कलेक्टर उनके फोन का जवाब नहीं देते। इस पर चंद्रशेखर ने दोनों को समझाया और गुटबाजी को तीन महीने में समाप्त करने की सलाह दी।
हालांकि, इसके बाद विवाद और बढ़ गया। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने चुनावी योजना 'लाड़ली बहना' पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस पर बहुत खर्च हो रहा है और इससे राज्य की वित्तीय स्थिति प्रभावित हो रही है। यह योजना शिवराज सिंह चौहान द्वारा शुरू की गई थी। इसके बाद, शिवराज ने अपने निर्वाचन क्षेत्र बुधनी में आदिवासी परिवारों के घरों को तोड़े जाने के खिलाफ धरना दिया। उन्होंने इसे 'जुल्म की पराकाष्ठा' करार दिया। यह केवल पार्टी के भीतर अनुशासन की कमी का मामला नहीं है, बल्कि यह सत्ता संघर्ष का भी संकेत है। शिवराज सिंह चौहान को मुख्यमंत्री रहते हुए उमा भारती और अन्य नेताओं का भी विरोध झेलना पड़ा था।
