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शेख हसीना ने छात्र आंदोलन पर उठाए गंभीर सवाल, सत्ता परिवर्तन की योजना का आरोप

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने हाल ही में एक वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस में 2024 के छात्र आंदोलन पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने इसे केवल छात्रों का विरोध नहीं, बल्कि सत्ता परिवर्तन की सुनियोजित रणनीति बताया। हसीना ने कहा कि पिछले दो वर्षों में देश की स्थिति बेहद दुखद है और यह उस बांग्लादेश से भिन्न है, जिसके लिए लाखों लोगों ने बलिदान दिया। उनके बेटे सजीब वाजेद ने भी आंदोलन के दौरान हुई मौतों के आंकड़ों पर सवाल उठाए। जानें इस मामले में और क्या कहा गया।
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शेख हसीना का मीडिया संबोधन

ढाका - बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने हाल ही में एक वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस में 2024 में हुए छात्र आंदोलन और उसके परिणामों पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन केवल छात्रों का विरोध नहीं था, बल्कि यह एक सुनियोजित राजनीतिक रणनीति का हिस्सा था, जिसका उद्देश्य सत्ता परिवर्तन करना था।


हसीना ने यह भी कहा कि भले ही उन्हें देश से दूर कर दिया गया हो, लेकिन उनका दिल हमेशा बांग्लादेश की जनता के साथ रहेगा। उन्होंने पिछले दो वर्षों में देश की स्थिति को बेहद दुखद बताया और इसे उस बांग्लादेश से भिन्न बताया, जिसके लिए 1971 में लाखों लोगों ने बलिदान दिया।


पूर्व प्रधानमंत्री ने बताया कि उनकी सरकार ने छात्र आंदोलन को बातचीत और कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने का प्रयास किया। लेकिन, उनके अनुसार, कुछ संगठित समूहों ने छात्रों की मांगों को राजनीतिक हथियार बना दिया और आंदोलन को हिंसक बना दिया।


हसीना ने यह भी कहा कि आंदोलन का कोई स्पष्ट नेतृत्व नहीं था और इसके निर्देश गुप्त रूप से दिए जा रहे थे। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि वर्तमान अंतरिम प्रशासन के प्रमुख मुहम्मद यूनुस के एक कथित बयान से यह संकेत मिलता है कि यह आंदोलन योजनाबद्ध था।


इसके अलावा, शेख हसीना के बेटे सजीब वाजेद ने 2024 के आंदोलन में हुई मौतों के आंकड़ों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र और बांग्लादेश सरकार द्वारा जारी आंकड़ों में बड़ा अंतर है और इस अंतर की स्पष्ट जानकारी अब तक सार्वजनिक नहीं की गई है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र से इस मामले में पारदर्शिता की मांग की।


सजीब वाजेद ने अंतरिम सरकार पर आरोप लगाया कि सत्ता में आने के बाद एक ऐसा कानून लागू किया गया, जिससे आंदोलन में शामिल लोगों को अभियोजन से व्यापक कानूनी सुरक्षा मिली। उनके अनुसार, इससे हिंसा और हत्याओं के मामलों में जवाबदेही तय करना मुश्किल हो गया है।


हालांकि, इन सभी आरोपों पर अंतरिम बांग्लादेश सरकार या संयुक्त राष्ट्र की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। इस मामले को लेकर राजनीतिक बहस लगातार बढ़ती जा रही है।