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श्रीलंका में 2019 के ईस्टर हमले के दोषियों को मौत की सजा

श्रीलंका के पूर्व पुलिस प्रमुख पुजित जयसुंदरा और रक्षा मंत्रालय के पूर्व अधिकारी हेमासिरी फर्नांडो को 2019 के ईस्टर संडे आतंकी हमले के मामले में मौत की सजा सुनाई गई है। इस हमले में 270 से अधिक लोगों की जान गई थी। उच्च न्यायालय ने इन अधिकारियों को खुफिया सूचनाओं पर कार्रवाई न करने का दोषी ठहराया। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और न्यायालय के निर्णय के पीछे की कहानी।
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श्रीलंका के पूर्व पुलिस प्रमुख को मिली सजा

श्रीलंका के पूर्व पुलिस प्रमुख पुजित जयसुंदरा और रक्षा मंत्रालय के पूर्व शीर्ष अधिकारी हेमासिरी फर्नांडो को 2019 के ईस्टर संडे आतंकी हमले के मामले में शुक्रवार को मौत की सजा सुनाई गई। इस भयानक हमले में 270 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके थे। उच्च न्यायालय ने इन दोनों पूर्व अधिकारियों को खुफिया सूचनाओं पर उचित कार्रवाई न करने का दोषी पाया।


हमले का विवरण और न्यायालय का निर्णय

अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि समय पर कदम उठाए जाते, तो इन हमलों को टाला जा सकता था। पुलिस के अनुसार, 21 अप्रैल 2019 को गिरजाघरों और महंगे होटलों पर हुए आत्मघाती बम धमाकों में 279 लोगों की मौत हुई, जिनमें 45 विदेशी नागरिक भी शामिल थे। जयसुंदरा और फर्नांडो को 2019 में गिरफ्तार किया गया था।


पुनः सुनवाई और उच्चतम न्यायालय का आदेश

चार महीने की हिरासत के बाद, उन्हें जमानत पर रिहा किया गया था। नवंबर 2021 में उनके खिलाफ आरोप तय किए गए थे, जिसमें भारतीय एजेंसियों से मिली खुफिया जानकारी की अनदेखी करने का आरोप था। उच्च न्यायालय ने फरवरी 2022 में उन्हें बरी कर दिया था, लेकिन नवंबर 2024 में अटॉर्नी जनरल द्वारा दायर अपील के बाद मामले की पुनः सुनवाई शुरू हुई।


न्यायालय का अंतिम निर्णय

अटॉर्नी जनरल ने कहा कि पिछली सुनवाई में बचाव पक्ष ने कोई गवाह पेश नहीं किया। न्यायमूर्ति प्रियंथा लियानागे और न्यायमूर्ति तिलकरत्ने बंडारा ने बहुमत से निर्णय सुनाते हुए कहा कि खुफिया जानकारी की अनदेखी के कारण 268 लोगों की मौत हुई और 586 लोग घायल हुए। पीठ ने यह भी कहा कि जयसुंदरा ने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई।


ऐतिहासिक फैसला

तीन सदस्यीय पीठ के न्यायमूर्ति विराज वीरसूरिया ने अलग राय दी और दोनों को बरी कर दिया। जयसुंदरा श्रीलंका पुलिस के इतिहास में 150 वर्षों में पहले ऐसे वरिष्ठ अधिकारी बन गए हैं, जिन्हें मुकदमे का सामना करना पड़ा और दोषी ठहराए जाने के बाद सजा सुनाई गई।