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श्रीलंका में भारत की सहायता से नया आपातकालीन स्वास्थ्य केंद्र स्थापित

श्रीलंका के मन्नार में भारतीय उच्चायोग ने एक नया आपातकालीन स्वास्थ्य केंद्र स्थापित किया है, जिसमें भारत द्वारा 600 मिलियन श्रीलंकाई रुपये की सहायता दी गई है। इस परियोजना का उद्देश्य इमरजेंसी हेल्थकेयर सेवाओं को बेहतर बनाना है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारत और श्रीलंका के बीच गहरे संबंधों को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत हमेशा मुश्किल समय में श्रीलंका के साथ खड़ा रहेगा। जानें इस महत्वपूर्ण सहयोग के बारे में और क्या कुछ योजनाएं हैं।
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श्रीलंका में नया स्वास्थ्य केंद्र

भारतीय उच्चायोग ने जानकारी दी है कि श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने बुधवार को मन्नार के जिला जनरल अस्पताल में दो मंजिला 'एक्सीडेंट एंड इमरजेंसी यूनिट' की आधारशिला रखी। इस परियोजना के लिए भारत ने 600 मिलियन श्रीलंकाई रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की है। इस कार्यक्रम में भारत के उच्चायुक्त संतोष झा और श्रीलंका के स्वास्थ्य मंत्री नलिनदा जयतिस्सा भी उपस्थित थे। इस परियोजना के तहत अस्पताल में इमरजेंसी हेल्थकेयर सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए आवश्यक चिकित्सा उपकरण भी उपलब्ध कराए जाएंगे। भारतीय उच्चायोग ने बताया कि इस सुविधा का उद्देश्य 'गोल्डन आवर' के दौरान समय पर इमरजेंसी देखभाल प्रदान करना है।


भारत का समर्थन

9 सितंबर को कोलंबो में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने श्रीलंका के साथ भारत के सहयोग को मजबूत करने का वादा किया। उन्होंने दोनों देशों के संबंधों को 'दिल और आत्मा' का रिश्ता बताया और भारत की भूमिका को 'फर्स्ट रिस्पॉन्डर' के रूप में रेखांकित किया। सिंह ने कहा कि भारत और श्रीलंका की साझा संस्कृति और इतिहास है। उन्होंने श्रीलंका को भारत का 'सबसे करीबी दोस्त' बताया और कहा कि भारत हमेशा मुश्किल समय में मदद के लिए आगे आता है।


रक्षा मंत्री ने पिछले साल 'डिटवाह' चक्रवात के बाद भारत द्वारा की गई त्वरित सहायता का उल्लेख किया, जब भारत ने श्रीलंका के लिए 'ऑपरेशन सागर बंधु' शुरू किया था। उन्होंने कहा कि भारतीय सशस्त्र बलों और श्रीलंकाई सरकारी एजेंसियों के संयुक्त प्रयासों से लोगों की जान बचाने और राहत कार्यों में मदद मिली। सिंह ने यह भी कहा कि श्रीलंका भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।