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संयुक्त राष्ट्र महासचिव की सुरक्षा परिषद में सुधार की अपील

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतारेस ने विश्व नेताओं से सुरक्षा परिषद में सुधार की अपील की है। उन्होंने कहा कि परिषद को वर्तमान वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए अधिक प्रभावी और वैध होना चाहिए। गुतारेस ने अफ्रीका के स्थायी प्रतिनिधित्व की कमी पर भी चिंता जताई और भारत के सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट की मांग का समर्थन किया। उनका यह संदेश वैश्विक शासन प्रणाली में आवश्यक बदलाव की आवश्यकता को उजागर करता है।
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सुरक्षा परिषद में सुधार की आवश्यकता

(योषिता सिंह) संयुक्त राष्ट्र, 22 सितंबर: संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतारेस ने मंगलवार को विश्व नेताओं से सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि परिषद वर्तमान वैश्विक परिदृश्य का सही प्रतिनिधित्व करे और मौजूदा भू-राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर सके। यह महासभा का उनका अंतिम उच्च स्तरीय सप्ताह है, और उनका दूसरा कार्यकाल दिसंबर 2026 में समाप्त होगा।


गुतारेस का संदेश

गुतारेस ने महासभा के 81वें सत्र में अपने संबोधन में कहा, "हमें सुरक्षा परिषद में सुधार की आवश्यकता है ताकि यह आज की दुनिया की वैधता और प्रभावशीलता को दर्शा सके।" उन्होंने यह भी बताया कि सुरक्षा परिषद का गठन द्वितीय विश्व युद्ध के बाद हुआ था, लेकिन तब से दुनिया में कई परिवर्तन आए हैं, जो परिषद में दिखाई नहीं देते।


अफ्रीका का स्थायी प्रतिनिधित्व

उन्होंने अफ्रीका का उदाहरण देते हुए कहा, "जब संयुक्त राष्ट्र की स्थापना हुई थी, तब अधिकांश अफ्रीका उपनिवेशी शासन के अधीन था। आज भी, सुरक्षा परिषद में अफ्रीका के लिए कोई स्थायी सीट नहीं है। 21वीं सदी में यह अन्यायपूर्ण है।" गुतारेस ने इस स्थिति को बदलने की आवश्यकता पर बल दिया।


वैश्विक चुनौतियाँ

गुतारेस ने कहा, "हमारी संस्थाएं और वैश्विक शासन प्रणाली आज भी पुरानी वास्तविकताओं को दर्शाती हैं।" उन्होंने चेतावनी दी कि मानवता कई अभूतपूर्व खतरों का सामना कर रही है, जिससे सामूहिक कार्रवाई के तंत्र पर दबाव बढ़ रहा है। सुरक्षा परिषद में सुधार की उनकी मांग इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।


भारत की भूमिका

भारत ने सुरक्षा परिषद में सुधार के लिए कई वर्षों से प्रयास किए हैं, जिसमें स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों का विस्तार शामिल है। भारत का मानना है कि 1945 में स्थापित 15 देशों की यह परिषद अब 21वीं सदी की आवश्यकताओं को पूरा नहीं करती। नई दिल्ली ने सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट की मांग की है और 2028-29 के कार्यकाल के लिए अस्थायी सीट पाने की कोशिश कर रहा है।


भू-राजनीतिक मतभेद

गुतारेस ने भू-राजनीतिक मतभेदों और असमानताओं के बढ़ने पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि नए आर्थिक और राजनीतिक केंद्र उभर रहे हैं, और वैश्विक शासन प्रणाली अब भी पुरानी ताकतों के हितों को दर्शाती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हम एक बहुध्रुवीय विश्व की ओर बढ़ रहे हैं, जो एक अपरिवर्तनीय बदलाव है।