संयुक्त राष्ट्र महासभा में इजराइल और तुर्की के बीच कश्मीर पर विवाद
संयुक्त राष्ट्र महासभा में हंगामा
न्यूयॉर्क में चल रहे संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र में एक बड़ा विवाद उत्पन्न हुआ। जब इजराइल ने भारत और अपने प्रतिकूल तुर्की को देखते हुए अचानक उठकर जाने का निर्णय लिया। इस दौरान इजराइल ने एक वीडियो साझा किया जिसमें कई तोते दिखाए गए, जिन्हें यूरोप और मुस्लिम देशों का प्रतीक बताया गया।
तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगान, जो भारत और इजराइल के प्रतिकूल माने जाते हैं, ने महासभा में कश्मीर का मुद्दा उठाया। इसके बाद उन्होंने गाजा के मुद्दे पर इजराइल की आलोचना की। इस बीच, मुस्लिम देशों के संगठन ओआईसी ने भी भारत को कश्मीर पर नसीहत दी। यह वही ओआईसी है जो आपस में लड़ रहे मुस्लिम देशों के मुद्दों पर चुप्पी साधे हुए है।
आपको जानकर हैरानी होगी कि एर्दोगान ने 2019 से अब तक संयुक्त राष्ट्र महासभा में कश्मीर का जिक्र किया है, लेकिन 2024 में उन्होंने इस मुद्दे को नहीं उठाया।
तुर्की में भूकंप का प्रभाव
दरअसल, 2023 में तुर्की में आए भूकंप के बाद भारत ने सबसे पहले मदद की थी, जिसके लिए तुर्की की जनता ने भारत का आभार व्यक्त किया था। एर्दोगान को लगा कि अगर वह 2024 में कश्मीर का मुद्दा उठाते हैं, तो दुनिया की प्रतिक्रिया नकारात्मक हो सकती है। इसलिए उन्होंने एक साल का अंतराल रखा और फिर से कश्मीर का मुद्दा उठाना शुरू किया।
हर बार जब एर्दोगान कश्मीर का जिक्र करते हैं, तो वह गाजा का मुद्दा भी उठाते हैं। इस बार भी उन्होंने ऐसा ही किया। जैसे ही उन्होंने गाजा का नाम लिया, इजराइल के राजदूत डेनी डेनन ने अपनी टीम को इशारा किया और हॉल से बाहर निकलने का निर्णय लिया।
इजराइल ने इस अवसर का लाभ उठाते हुए एक वीडियो साझा किया जिसमें विभिन्न देशों को तोते के रूप में दर्शाया गया है। इस वीडियो के माध्यम से इजराइल ने यह संदेश दिया कि यूरोप और मुस्लिम देश फिलिस्तीन के मुद्दे पर केवल रटे-रटाए बयान देते हैं।
भारत की प्रतिक्रिया
भारतीय विदेश मंत्रालय ने ओआईसी को कश्मीर के मुद्दे से दूर रहने की सलाह दी है। ओआईसी, जिसमें तुर्की और पाकिस्तान जैसे 57 देश शामिल हैं, ने कश्मीर में जनमत संग्रह का मुद्दा उठाया था। विदेश मंत्री जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री रूबियो से मुलाकात कर 100% टैरिफ पर भी चर्चा की।
