Newzfatafatlogo

संशोधित एफसीआरए बिल पर जेपीसी की पहली बैठक नई दिल्ली में हुई

नई दिल्ली में एफसीआरए कानून में संशोधन के लिए जेपीसी की पहली बैठक हुई, जिसमें भाजपा सांसद संजय जायसवाल की अध्यक्षता में 31 सदस्य शामिल हैं। विपक्ष ने आरोप लगाया है कि यह बिल अल्पसंख्यक संस्थानों की फंडिंग को रोकने के लिए लाया गया है, जबकि सरकार ने इसे पारदर्शिता बढ़ाने का उपाय बताया है। इस बिल पर विस्तृत चर्चा की जाएगी और समिति को अपनी रिपोर्ट 2026 के शीतकालीन सत्र से पहले प्रस्तुत करनी है।
 | 

संशोधन पर चर्चा


नई दिल्ली में विदेशी चंदे के नियमन से संबंधित एफसीआरए कानून में संशोधन के लिए गठित संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की पहली बैठक शुक्रवार को आयोजित की गई। इस समिति की अध्यक्षता भाजपा सांसद संजय जायसवाल कर रहे हैं, जिसमें कुल 31 सदस्य शामिल हैं, जिनमें से 14 भाजपा के हैं। समिति में एनडीए का बहुमत होने के कारण इसके निर्णय सरकार के पक्ष में ही रहने की संभावना है।


यह ध्यान देने योग्य है कि केंद्र सरकार ने इस विवादास्पद बिल को मार्च में पेश किया था, लेकिन केरल विधानसभा चुनाव के कारण इसे रोक दिया गया था। चुनाव परिणामों के बाद, इसे संसद के मानसून सत्र में जेपीसी को भेजा गया। जेपीसी को 2026 के शीतकालीन सत्र के पहले सप्ताह के अंत तक लोकसभा में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी है।


विपक्ष का आरोप है कि एफसीआरए में संशोधन का यह बिल ईसाई एनजीओ और अल्पसंख्यक संस्थानों की वैध फंडिंग को रोकने के लिए लाया गया है, जिससे अल्पसंख्यकों को परेशान किया जा सके। हालांकि, सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि यह बिल किसी विशेष धर्म से संबंधित नहीं है। यह भी कहा जा रहा है कि विदेशी, विशेषकर अमेरिका के दबाव के कारण इस बिल को टाला जा रहा है।


यह बिल 25 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया था, लेकिन विपक्षी दलों के विरोध के चलते इसे 12 अगस्त को जेपीसी को भेजा गया। विपक्ष ने आरोप लगाया कि इस बिल के कुछ प्रावधान अत्यधिक आपत्तिजनक हैं, जिसमें विदेशी फंडिंग बंद होने या एफसीआरए लाइसेंस निरस्त होने पर एनजीओ की संपत्ति जब्त करने का प्रावधान भी शामिल है। समिति अब इस बिल के सभी प्रावधानों की गहन जांच करेगी। लोकसभा में बिल पेश करते समय केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा था कि इस कानून का उद्देश्य पारदर्शिता को बढ़ाना है और यह सुनिश्चित करना है कि विदेश से प्राप्त फंड का सही उपयोग हो।